नासिर खान बैराड़ -कहते हैं कि जान बचाने वाले का दर्जा भगवान से कम नहीं है। किसी को जीवनदान देने का काम स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी रोजाना करते हैं। पर ऐसा बहुत ही कम होता है जब विकट परिस्थितियों में किसी की खतरे में पड़ी जान को कम संसाधानों के साथ बचाया जाए। ईएमटी ने महिला को तेज प्रसव पीड़ा होने के चलते चलती एम्बुलेंस में ही नार्मल डिलीवरी कराई। जिससे जज्चा और बच्चा दोनों की जान बच गई। महिला ने एम्बुलेंस में बेटी को जन्म दिया। रविवार की दोपहर 108 एम्बुलेंस में किलकारी गूंजी। चलती एम्बुलेंस में महिला को तेज प्रसव पीड़ा होने के चलते ईएमटी (एमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन) ने नार्मल डिलीवरी कराई। जबकि महिला को पूरा केस बहुत ही ज्यादा क्रिटिकल था। बताया जा रहा हैं। बच्चा पेट में उल्टा हो गया था रविवार की सीएचसी बैराड़ से मनीषा पत्नी मनोज धाकड़ निवासी गाजीगढ़ को बैराड़ अस्पताल से जिला अस्पताल रेफर किया गया। महिला की हालत बहुत ही गंभीर थी। बैराड़ से निकलने के बाद पोहरी के पास में महिला की बहुत ज्यादा हालात खराब हो गई। एम्बुलेंस में मौजूद ईएमटी सतीश अर्गल ने बहुत ही सूझबूझ के साथ महिला को इलाज किया। एम्बुलेंस जिला अस्पताल के चलती रही। वहीं महिला प्रसव पीड़ा से कराह रही थी। गर्भ में बच्चा उल्टा होने से नाल में फंसे होने के चलते डिलीवरी नहीं हो पा रही थी। लेकिन ईएमटी सतीश अर्गल ने एंबुलेंस ड्राइवर बल्लेश श्रीवास के साथ कम संसाधानों में महिला की नार्मल डिलीवरी कराई और मनीषा धाकड़ ने बेटी को जन्म दिया। तब जाकर परिजनों ने राहत की सांस ली। उसके बाद एम्बुलेंस पोहरी अस्पताल पहुंची और मौजूद चिकित्सकों ने अग्रिम इलाज किया। अब जज्चा व बच्चा पूरी तरह स्वास्थ्य हैं

