108 मुनि श्री चिन्मय सागर जी महाराज वाले बाबा



ऐ-से दिगम्बर वेश को नमन करू शत बार
क-र्म काटने के लिए दर्शन को हुई तैयार*
सो-भाग्य उदय आया मेने गुरु का दर्शन पाया*
आ-शा मेरी पूर्ण हुई ह्दय*
कमल भी हर्षाया
ठ-हरी में ठिठकी सी देख
गुरु की साधना को
मु-खार विंद की अमृतवाणी जिनवाणी माँ प्रगट हुई*
नि-श्चय माँ जिनवाणी सबको सच्चा मार्ग दिखती है*
श्री-मुनि महिमा सुनकर कुछ लिखने को तैयार हुई*
चि-न्ता करू तो तो ऐसी करू सम्यक दर्शन पाने की*
न-मन करू में गुरुवर को भव से तिराने को*
म-मता को दूर भगाकर माया से नाता तोड़ लू*
य-मराज बुलावा आने पर व्रत सल्लेखना धारण करू*
सा-गर से गहरे है गुरुवर समता रस जे धारी है*
ग-म दूर भगाने वाले सबके वो हितकारी है*
र-मता जो दिन रात भोगो में उसको शिक्षा देते है*
जं-ग जब छिड़ती कर्मो की साधना से शान्त करे*
ग-ल जावे कर्म बेरी पूण्य उदय हो जाते*
ल-ख धन्यवाद है ईश्वर का*
शुभ घड़ी आई है*
वा-णी में शीतलता आई*
मम ह्रदय कली मुस्काई है*
ले-जाऊ चरण रज आशीर्वाद समझ*
बा-की तो गुरु संभालेगे*
बा-रंबारनमन मेरा नईया पार लगाएंगे*
*प्रस्तुति:-राष्ट्रीय संवाद दाता पारस जैन "पार्श्वमणि पत्रकार कोटा*

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