काेठियां-मुनि श्री नमित सागर ji महाराज ने गुरुवार रात 1.55 बजे सल्लेखना पूर्वक देवलोक गमन हो गए।
एक परिचय नमित सागर जी महाराज
जीवन काल में 16 कारण के 16 बरस तक 16-16 उपवास किए। कितनी ही बार 32-32 उपवास भी किए। उन्होंने मुनिचर्या का बहुत द्रढ़ता से पालन किया।
अभी पंचम पट्टाचार्य 108 आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज के संघ में चातुर्मास के लिए चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की दीक्षा स्थली यरनाल कर्नाटक में विराजित थे। उनका जन्म कोठियां में वर्ष 1946 में हुआ। बचपन का नाम कैलाश चंद्र पुत्र घीसा लाल सेठी व माता का नाम कवरी बाई था। वर्ष 1964 में 105 आर्यिका इंदुमती माताजी व सुपार्श्व मति माताजी ससंघ कोठियां आए। प्रवचन से प्रभावित हाेकर उन्होंने घर त्यागने का मन बनाया। इसके बाद संघ में रहने लगे। 35 वर्ष तक माताजी के संघ में रहकर सेवा करते हुए सभी तीर्थ स्थलों व अतिशय क्षेत्रों की वंदना की। वर्ष 1999 में पंचम पट्टाचार्य 108 आचार्य श्रीवर्धमान सागर जी महाराज के संघ में शामिल होकर ऐलक दीक्षा जयपुर भट्टारकजी की नसिया में ग्रहण की। वर्ष 2000 में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के जन्म स्थान सनावद में मुनि दीक्षा लेकर नमित सागर नाम पाया।
एक परिचय नमित सागर जी महाराज
जीवन काल में 16 कारण के 16 बरस तक 16-16 उपवास किए। कितनी ही बार 32-32 उपवास भी किए। उन्होंने मुनिचर्या का बहुत द्रढ़ता से पालन किया।
अभी पंचम पट्टाचार्य 108 आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज के संघ में चातुर्मास के लिए चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की दीक्षा स्थली यरनाल कर्नाटक में विराजित थे। उनका जन्म कोठियां में वर्ष 1946 में हुआ। बचपन का नाम कैलाश चंद्र पुत्र घीसा लाल सेठी व माता का नाम कवरी बाई था। वर्ष 1964 में 105 आर्यिका इंदुमती माताजी व सुपार्श्व मति माताजी ससंघ कोठियां आए। प्रवचन से प्रभावित हाेकर उन्होंने घर त्यागने का मन बनाया। इसके बाद संघ में रहने लगे। 35 वर्ष तक माताजी के संघ में रहकर सेवा करते हुए सभी तीर्थ स्थलों व अतिशय क्षेत्रों की वंदना की। वर्ष 1999 में पंचम पट्टाचार्य 108 आचार्य श्रीवर्धमान सागर जी महाराज के संघ में शामिल होकर ऐलक दीक्षा जयपुर भट्टारकजी की नसिया में ग्रहण की। वर्ष 2000 में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज के जन्म स्थान सनावद में मुनि दीक्षा लेकर नमित सागर नाम पाया।
कर्नाटक में बाहुबली भगवान के दो बार कलशाभिषेक मे मोजूद रहे
मुनि नमित सागर महाराज के बड़े भाई लादू लाल सेठी अध्यापक थे। जिनका स्वर्गवास हो चुका है। छोटे भाई निर्मल सेठी भीलवाड़ा रहते हैं। निर्मल सेठी, पत्नी, भाभी और भतीजे अभी यरनाल हैं। आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज के पूरे संघ में यह भी संत थे। पूरे संघ के सानिध्य में श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) में बाहुबली भगवान के कलशाभिषेक वर्ष 2006 2018 में यह मोजूद रहे। इन्होंने जयपुर, किशनगढ़, ब्यावर, निवाई, सिद्धवरकुट और श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) में प्रवचन दिए। पूरा परिवार चातुर्मास में दर्शन के लिए प्रतिवर्ष जाता है।
पिता घीसालाल सेठी जैन धर्म के पंडित थे... मुनि श्री नमित सागर जी महाराज के भाभी, भाई, भतीजे कोठियां में ही रहते हैं। भतीजे अशोक सेठी ने बताया कि जब भी उनका चतुर्मास होता रहां जाकर आशीर्वाद लेते हैं। मुनि श्री को पूरा संघ तपस्वी मानता था। परिवार जन बताते है जब भी हम जाते थे तो इनके बारे में ऐसा सुनने पर पूरे परिवार को गर्व होता था। पिता घीसा लाल सेठी जैन धर्म के पंडित थे। मुनि के भतीजे की बहू पांच प्रतिमा धारी है, जो कि कहीं भी मुनि व आर्यिका संघ को आहार देती है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
मुनि नमित सागर महाराज के बड़े भाई लादू लाल सेठी अध्यापक थे। जिनका स्वर्गवास हो चुका है। छोटे भाई निर्मल सेठी भीलवाड़ा रहते हैं। निर्मल सेठी, पत्नी, भाभी और भतीजे अभी यरनाल हैं। आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज के पूरे संघ में यह भी संत थे। पूरे संघ के सानिध्य में श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) में बाहुबली भगवान के कलशाभिषेक वर्ष 2006 2018 में यह मोजूद रहे। इन्होंने जयपुर, किशनगढ़, ब्यावर, निवाई, सिद्धवरकुट और श्रवणबेलगोला (कर्नाटक) में प्रवचन दिए। पूरा परिवार चातुर्मास में दर्शन के लिए प्रतिवर्ष जाता है।
पिता घीसालाल सेठी जैन धर्म के पंडित थे... मुनि श्री नमित सागर जी महाराज के भाभी, भाई, भतीजे कोठियां में ही रहते हैं। भतीजे अशोक सेठी ने बताया कि जब भी उनका चतुर्मास होता रहां जाकर आशीर्वाद लेते हैं। मुनि श्री को पूरा संघ तपस्वी मानता था। परिवार जन बताते है जब भी हम जाते थे तो इनके बारे में ऐसा सुनने पर पूरे परिवार को गर्व होता था। पिता घीसा लाल सेठी जैन धर्म के पंडित थे। मुनि के भतीजे की बहू पांच प्रतिमा धारी है, जो कि कहीं भी मुनि व आर्यिका संघ को आहार देती है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

