वर्तमान में व्यक्ति अपनी भारतीय संस्कृति को तिलांजलि देकर पाश्चात्य संस्कृति को अपना रहा है: अभय सागर जी



खुरई -जो व्यक्ति रत्नत्रय का धारी होता है उसका कल्याण स्वमेव हो जाता है। वर्तमान समय में व्यक्ति अपनी भारतीय संस्कृति को तिलांजलि देकर पाश्चात्य संस्कृति को अपना रहा है जिससे उसका चारित्रक पतन तो हो रहा है, उसके साथ ही आत्मीय संबंध भी तार-तार हो रहे हैं।
प्राणी मात्र की रक्षा करना तो दूर अब वह अपनों से भी संबंध नहीं बना पा रहा है। यह बात जैन मंदिर में प्रवचन देते हुए मुनिश्री अभय सागर जी महाराज ने कही।
वर्तमान समय में व्यक्ति का रहन-सहन, खाना-पीना सब बिगड़ता जा रहा है मुनिश्री प्रभातसागर जी
मुनिश्री प्रभातसागर जी महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में व्यक्ति का रहन-सहन, खाना-पीना सब बिगड़ता जा रहा है। बच्चों को अभिभावकों के लाड़-प्यार ने बिगाड़ दिया है। मोबाइल संस्कृति ने भी सबकुछ तहस-नहस करके रख दिया है। अब तो शिक्षक भी बच्चों को डांट-फटकार नहीं कर सकता, मारने की बात तो बहुत दूर की है। बाकी कसर पाश्चात्य संस्कृति ने पूरी कर दी।
वर्तमान समय में अंधानुकरण चरम सीमा पर मुनिश्री निरीहसागर जी
मुनिश्री निरीहसागर जी महाराज ने कहा कि वर्तमान समय में अंधानुकरण चरम सीमा पर है। हमारा विवेक शून्य होता जा रहा है। हम अच्छे-बुरे की परवाह किए बिना भौतिक सुख की चाहत में अपना सर्वस्व गंवाने को आतुर प्रतीत हो रहे हैं।
विद्वानों का सम्मान
नवीन जैन मंदिर एवं लाल मंदिर गुरूकुल में दसलक्षण पर्व पर प्रवचन करने वाले पं. प्रियंक शास्त्री, पं. नियम शास्त्री, ब्रह्मचारी दिवाकर एवं मोहित शास्त्री का सम्मान श्रीमंत धर्मेन्द्र सेठ, प्रकाश सराफ, हेमचंद बजाज ने श्रीफल, शाल एवं प्रतीक चिन्ह देकर किया। इसके साथ ही गुरूकुल के व्यवस्थापक अरुण जैन द्वारा निर्देशित 'बाप बढ़ा न भैया, सबसे बड़ा रुपैया, की प्रस्तुति देने वाले छात्रों का सम्मान किया गया। सम्मान समारोह को जयेश मोदी, विजय सत्यप्रिय ने संबोधित किया।
        संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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