रकृति के आनंद को प्राप्त करना मानव जीवन के लिए श्रेष्ठ-आचार्य



सागवाड़ा-आचार्य सुनील सागर जी  म हाराज ने शुक्रवार को ऋषभ वाटिका स्थित सन्मति  समवशरण सभागार में प्रवचन में कहा कि जीवन में मौन और शांत रहकर बहुत कुछ  प्राप्त किया जा सकता है।
आचार्य ने  भौतिक संसाधनों की गुलामी का त्याग करने का आह्वान करते हुए कहा कि  प्राकृतिक संपदा का संरक्षण कर प्रकृति के आनंद को प्राप्त करना मानव जीवन  के लिए श्रेष्ठ है। आचार्य ने कहा कि वास्तविक स्वभाव के साथ प्रभु भक्ति  के मार्ग पर चलकर आत्मा से परमात्मा की और आगे बढ़ा जा सकता है और इसके लिए  प्राचीन शास्त्रों और धर्मग्रंथों का अध्ययन करना बहुत जरूरी है। यह साधना  जीवन का रंग बदल देगी और तरक्की के मार्ग पर जीवन को अग्रसर करेगी। आचार्य  ने पर्यूषण पर्व पर अन्य धर्मों के लोगों द्वारा उपवास करने पर हर्ष  व्यक्त कर कहा कि जैन समाज प्राचीन-पुरातन उपवास तप साधना की परंपरा का  निर्वहन कर समस्त जीवों के कल्याण और उनकी आत्मशुद्धि के मार्ग पर आगे बढ़  रहा है।
उपवास साधकों की पालकी यात्रा निकाली :
  इससे पूर्व सुबह  में आचार्य के सानिध्य में चतुर्मास के दौरान पर्युषण महापर्व समाप्ति पर  उपवास साधकों की सकल दशा हुमड़ जैन समाज के तत्वाधान में भव्य पालकी यात्रा  निकाली। सभी साधकों के साथ ही व्रत एवं उपवासियों ने मुनि और आर्यिका संघ  के तत्वावधान में पूजा अर्चना की और भगवान का अभिषेक किया। इसके बाद भगवान  को गंधकुटी में विराजित कर भगवान की शोभा यात्रा निकाली। शोभा यात्रा के  दौरान साधकों को पालकी में बैठाया गया था। शोभा यात्रा नगर के विभिन्न  मार्गो से होकर ऋषभ वाटिका स्थित समवशरण प्रवचन सभागार पहुंची।
          संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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