लार-पर्युषण पर्व के अंतिम दिन व्रत के बाद आज हम सभी क्षमावाणी पर्व मना रहे हैं। सभी व्यक्ति वाणी से क्षमा मांगते हैं और वाणी से ही क्षमा कर देते हैं, लेकिन जो मन-वचन-काया से क्षमा मांगता है, वह व्यक्ति ही वीर कहलाता है। आप को वीर, अतिवीर, महावीर बनना है, तो उनके द्वारा बताए मार्ग पर चलें। यह प्रवचन सोमवार को को ग्राम पंचायत लार में क्षमावाणी पर्व पर आयोजित धर्मसभा में आर्यिका अनुनयमति माताजी ने श्रद्धालुओं को दिए।
उन्होंने कहा हम अपने अंदर टटोले कि जो हम क्षमा मांग रहे हैं, या कर रहे हैं। वह हृदय से हो रही है या नहीं। यदि हृदय से है, तो बहुत अच्छा और यदि नहीं है, तो हम इसके कारण को समझने का प्रयास करें। हमारे अंदर कषाय क्यों बनी है। मन मिटाव विघटन क्यों है? क्या इसमें हमारी स्वयं की गलती है? अथवा दूसरे की। माताजी ने कहा कि व्यक्ति दूसरों को अपनी गलती न सुना सके, लेकिन परमात्मा, महात्मा (गुरु) और अपनी आत्मा को वह मिस्टेक जरूर सुना देना चाहिए, जो व्यक्ति परमात्मा के सामने बैठकर अपनी गलती को स्वीकार करते हैं, वे पापों से बच जाते हैं।
जीचन में गुरु एक ही होना चाहिए
माताजी कहा कि सभी का समान आदर सत्कार करते हैं। क्योंकि यदि आप यह ही कहोगे कि गुरु एक ही होना चाहिए। पिता एक ही होता है, तो ये बताएं कि जिसे आपने गुरु के रूप मे स्वीकार किया है, उनकी समाधि हो गई है, तो आप क्या करेंगे? क्या बिना गुरु के जीवन व्यतीत करेंगे। गुरु के बिना तुम्हारा कल्याण कैसे होगा तुम संसार में घूमते रहोगे। दीक्षा लेने के बाद हमने जिनसे दीक्षा ली है, वे हमारे प्रधान गुरु कहलाते हैं। हम उन्हें प्रथम नमस्कार करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नही हैं कि हम शेष गुरुओं को गुरु ही ना माने उनका अपमान व अनादर करें। हमारी ऐसी अंधी गुरुभक्ति नहीं होना चाहिए। आप इस बात को अच्छी तरह समझ चुके हैं ढाई द्वीप में होने वाले तीन कम नौ करोड़ सभी निग्रंथ दिगंबर संत हमारे गुरु हैं।
क्षमावाणी कार्यक्रम का शुभारंभ शुभारंभ मुख्य अतिथि टीकमगढ़ विधायक राकेश गिरि गोस्वामी ने दीप प्रज्जवलित कर किया। जैन समाज द्वारा विधायक का शॉल श्रीफल व माला पहनाकर स्वागत सम्मान किया। इस अवसर पर , सकल दिगम्बर जैन समाज व आसपास के ग्रामीण उपस्थित थे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
उन्होंने कहा हम अपने अंदर टटोले कि जो हम क्षमा मांग रहे हैं, या कर रहे हैं। वह हृदय से हो रही है या नहीं। यदि हृदय से है, तो बहुत अच्छा और यदि नहीं है, तो हम इसके कारण को समझने का प्रयास करें। हमारे अंदर कषाय क्यों बनी है। मन मिटाव विघटन क्यों है? क्या इसमें हमारी स्वयं की गलती है? अथवा दूसरे की। माताजी ने कहा कि व्यक्ति दूसरों को अपनी गलती न सुना सके, लेकिन परमात्मा, महात्मा (गुरु) और अपनी आत्मा को वह मिस्टेक जरूर सुना देना चाहिए, जो व्यक्ति परमात्मा के सामने बैठकर अपनी गलती को स्वीकार करते हैं, वे पापों से बच जाते हैं।
जीचन में गुरु एक ही होना चाहिए
माताजी कहा कि सभी का समान आदर सत्कार करते हैं। क्योंकि यदि आप यह ही कहोगे कि गुरु एक ही होना चाहिए। पिता एक ही होता है, तो ये बताएं कि जिसे आपने गुरु के रूप मे स्वीकार किया है, उनकी समाधि हो गई है, तो आप क्या करेंगे? क्या बिना गुरु के जीवन व्यतीत करेंगे। गुरु के बिना तुम्हारा कल्याण कैसे होगा तुम संसार में घूमते रहोगे। दीक्षा लेने के बाद हमने जिनसे दीक्षा ली है, वे हमारे प्रधान गुरु कहलाते हैं। हम उन्हें प्रथम नमस्कार करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नही हैं कि हम शेष गुरुओं को गुरु ही ना माने उनका अपमान व अनादर करें। हमारी ऐसी अंधी गुरुभक्ति नहीं होना चाहिए। आप इस बात को अच्छी तरह समझ चुके हैं ढाई द्वीप में होने वाले तीन कम नौ करोड़ सभी निग्रंथ दिगंबर संत हमारे गुरु हैं।
क्षमावाणी कार्यक्रम का शुभारंभ शुभारंभ मुख्य अतिथि टीकमगढ़ विधायक राकेश गिरि गोस्वामी ने दीप प्रज्जवलित कर किया। जैन समाज द्वारा विधायक का शॉल श्रीफल व माला पहनाकर स्वागत सम्मान किया। इस अवसर पर , सकल दिगम्बर जैन समाज व आसपास के ग्रामीण उपस्थित थे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

