अंतरंग ओर बहिरंग परिग्रह का त्याग करें-ब्र. प्रदीप शास्त्री पीयूष



कोटा (राज)-उत्तम ज्याग करने वाले व्यक्ति को मुक्ति सुंदरी स्वयम वरण करती है देवता भी सिर उसके सामने झुकाते है।  अपने मन मे भावो से जिसे अपना माना उसी का विवेक पूर्वक त्याग कर देना उत्तम त्याग कहलाता है। उत्तम त्याग करके व्यक्ति अपने जीवन का उद्धार करता है अपने आत्म कल्याण का मार्ग खोज लेता है।अंतरंग बहिरंग परिग्रह का त्याग विषय सुखो का त्याग उत्तम त्याग धर्म है। जो भवन छोड़ वन गया उसका जीवन बन गया। भगवान राम महावीर के जीवन चरित्र को देखे।जो जोड़ता है वह नीचे गमन करता है जो मन वचन काया से विवेक से छोड़ता है वो ऊपर उठता है। उक्त उदगार बाल ब्रह्मचारी प्रदीप शास्त्री पीयूष ने आर के पुरम स्थित श्री 1008 श्री मुनिसुव्रतनाथ दिगम्बर जैन त्रिकाल चौबीसी मंदिर में आयोजित धर्मसभा में उत्तम त्याग धर्म के दिन  व्यक्त किये।*
*मंदिर समिति के अध्यक्ष जिनेंद्र जैन बरमुंडा प्रचार प्रसार मंत्री पारस जैन "पार्श्वमणि" ने बताया कि आज* **प्रथमाभिषेक करने का सौभाग्य श्री मान छोटूलाल जी, श्री मति रोशन देवी, जितेन्द्र जी, श्री मति कल्पना जी, परिवार मूलनायक भगवान पर शांतिधारा करने का सौभाग्य श्री मान ज्ञानचन्द जी, श्री मति प्रेमलता जी,  दुगेरिया परिवार, मोड़क वाले महाआरती*करने का सौभाग्य श्री मान जी, मनीष जी, अंकित जी, श्री मति दीपांशी जी, धानोत्या परिवार, झांतला वाले को मिला।ताज नगरी आगरा से माँ जिनवाणी म्यूजिकल ग्रूप के सोनू जैन ने संगीत की सुमधुर ध्वनियों से पूजा कराई।*
*धर्मसभा में अमोलक चंद जैन रूपचंद चन्द जैन पी सी जैन चंद्रेश जैन ललित जैन हरसौरा मुकेश जैन ज्ञान चंद जैन  विमल चंद जैन उपस्थित थे।*
*प्रस्तुति राष्ट्रीय संवाद दाता पारस जैन पार्श्वमणि पत्रकार कोटा

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