प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में संयम रूपी ब्रेक होना चाहिए, तभी वह अपनी आत्मा का कल्याण कर सकता है: मुनि श्री



कुण्डलपुर-पावन वर्षायोग में कुण्डलपुर सिद्धक्षेत्र वर्तमान में हरियाली से भरा हुआ है, चारों ओर प्रकृति की अनुपम घटा बिखर रही है। पर्वराज पर्युषण पर विभिन्न दैनिक कार्यक्रम हो रहे हैं। प्रातः पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि श्री समय सागर जी तत्वार्थ सूत्र जी के अध्याय का विवेचन कर रहे हैं और दोपहर में दस अध्यायों का वाचन ससंघ मुनिराज कर रहे हैं, धर्म का विवेचन भी दोपहर में हो रहा है। पं. रतनलाल जी बेनाड़ा प्रति दिन दो कक्षाएं सामायिक पाठ, शंका समाधान की ले रहे हैं तो ब्रह्मचारी संजीव भैया कटंगी प्रतिदिन इष्टोपदेश की कक्षा ले रहे हैं।
इसी क्रम में उत्तम संयम दिवस पर प्रवचनों में मुनि श्री प्रशस्त सागर जी Iमहाराज ने कहा कि जो कषायों को जीत लेता है उसे सत्य का दर्शन हो जाता है जो सत्य को जीतता है उसकी जिम्मेदारी बढ़ जाती है, अर्थात जो सत्य मिला है वह गड़ढे में न गिर जाए उसकी सुरक्षा के लिए संयम आवश्यक है। सत्य रूपी दीप जीवन में जला है तो वासनाओं की हवा से बुझ न जावे उसमें चारों ओर से सुरक्षा के लिए व्रत, संयम रूप जाली लगाकर प्रतिपल जीवित रखने का प्रयास करना चाहिए। श्रावक भी एक देश संयम को ग्रहण कर सकता है। प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में संयम रूपी ब्रेक होना चाहिए तभी वह अपनी आत्मा का कल्याण कर सकता है।
   प्रचार मंत्री सुनील वेजीटेरियन से प्राप्त जानकारी
     संकलन अभिषेक जैन लुहादीया रामगंजमंडी

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