दिल्ली-भारत वसुन्धरा पर चार ऐसे महान संत हुवे जिनके नाम "वि" से शुरू होते है। परम पूज्य वात्सल्य तप साधना की मूर्ति श्री आचार्य 108 विमल सागर जी महाराज परम पूज्य आचार्य 108 श्री विद्या सागर जी महाराज तप संयम साधना की साक्षात मूर्ति*
*परम पूज्य आचार्य 108 श्री विराग सागर जी महाराज जिन्होंने वी नाम से 80 से अधिक शिष्य बनाये।*
*इस सदी के महानायक महासाधक जिन्हें लोग चलती फिरती लाइब्रेरी के नाम से जानते है विद्या के भंडार है । जिन्होंने जैन धर्म दर्शन प्रचार प्रसार में अपना अमूल्य जीवन समर्पित किया है । 95 बसंत पार कर लिए। आज उन संयम तप साधना की साक्षात मूर्ति का मृत्यु महोत्सव का नजारा सब देख रहे है।*
*कुंद कुंद भारती में जैन दर्शन के महासाध के मुनिराज 75 साल से दीक्षित प.पू. सिद्धान्त चक्रवर्ती श्वेतपिच्छाचार्य विद्यानंद जी मुनिराज ने 19 सितंबर 2019 को प्रातःकाल चारो प्रकार के आहार का त्याग और अपने सभी पदों का त्याग करके यम संलेखना धारण की और छपक मुनिराज बने*मुनिराज की संलेखना निराकुलता पूर्वक चल रही है*
*छपक मुनिराज की संलेखना आचार्य श्री वसुनन्दी जी के निर्देशन में और आचार्य श्री श्रुत सागर जी मुनिराज के सहयोग से चल रही है अभी संलेखना में लगभग 48 पीछी विराजमान है*
1. *प.पू आचार्य वसुनन्दी जी मुनिराज संसंघ*
(ज्ञानानंद जी मुनिराज
सर्वानंद जी मुनिराज
आत्मानंद जी मुनिराज
निजानंद जी मुनिराज
सयंमानंद जी मुनिराज
प्रज्ञानंद जी मुनिराज
ध्यानानंद जी मुनिराज
शिवानंद जी मुनिराज
प्रश्मानंद जी मुनिराज
ऐलक विज्ञान सागर जी
छुलक विशंक सागर जी
आर्यिका पदमनंदनी माताजी
आर्यिका वर्धस्ववनंदनी माताजी
आर्यिका वर्चस्वनंदनी माताजी
आर्यिका श्रेयनंदनी माताजी
आर्यिका सुरम्यनंदनी मताजी
आर्यिका यशोनन्दनी माताजी
छू. तीर्थनन्दनी माताजी )
2. *आचार्य श्रुतसागर जी मुनिराज*
( अनुमान सागर जी मुनिराज
क्षुल्लक अविरल सागर जी)
3. *आचार्य प्रज्ञसागर जी मुनिराज*
( प्रथमानंद जी मुनिराज
प्रतिज्ञानंद जी मुनिराज
क्षु. प्रयागमती माताजी )
4. *आचार्य सौभाग्य सागर जी मुनिराज*
( ऐ. विदक्ष सागर जी
क्षु. सुविमल सागर जी
क्षु. शुभारम्भमंती माताजी
क्षु. शुभाशीषमति माताजी )
5. *मुनि प्रभावसागर जी मुनिराज*
6. *ग. आर्यिका प्रज्ञमती माताजी*
7. *आर्यिका भाग्यमती माताजी*
8. *आर्यिका सृस्टिभूषण माताजी*
9. *क्षु. धवल सागर जी*
10. *क्षु. पूजाभूषण*
*क्षु. भक्तिभूषण*
11. स्वस्ति श्री भानुकीर्ति भट्टारक स्वामी जी, कम्बदल्ली
12. स्वस्ति श्री चारुकीर्ति पंडिताचार्यवर्य भट्टारक स्वामी जी मूडबद्री
13. स्वस्ति श्री धर्मसेन भट्टारक स्वामी जी श्री नवग्रहतीर्थ
14. स्वस्ति श्री देवेंद्रकीर्ति भट्टारक स्वामी जी श्री हुम्बुज जैन मठ
15. स्वस्ति श्री लक्ष्मीसेन भट्टारक स्वामी जी श्री N.R. पुर जैन मठ
16. स्वस्ति श्री जिनसेन भट्टारक स्वामी जी श्री नादनी जैन मठ
17. स्वस्ति श्री सिद्धान्तकीर्ति भट्टारक स्वामी जी श्री क्षेत्र आरतीपुर
18. स्वस्ति श्री सौरभसेन भट्टारक स्वामी जी तिजारा
19. पीठाधीश स्वस्ति रविन्द्र कीर्ति जी जम्बूदीप
20. बा. ब्र. इंद्रकुमार जैन(पोटी)
*प्रस्तुति :- राष्ट्रीय संवाद दाता*
*पारस जैन "पार्श्वमणि"पत्रकार
