बिजाैलिया-पार्श्वनाथ तपोदय तीर्थ पर दैनिक प्रवचन शृंखला में शुक्रवार काे मुनि पुंगव सुधासागरजी महाराज ने कहा कि जन्म किसी भी मुहूर्त व स्थान पर हो मृत्यु का स्थान और मुहूर्त शुभ होना चाहिए। हर जीव को यही भावना भानी चाहिए कि उसका मरण मंदिर तीर्थ या साधू-संतों के सानिध्य में हो। जब डाॅक्टर किसी रोगी के बचने की संभावना से इंकार कर दे तो उनके परिजनों को चाहिए कि जीवन के अंतिम समय में उसको सल्लेखना पूर्ण समाधि लेने दें, ताकि वह ईश्वर का स्मरण करते हुए मुक्ति पा सके। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य की सफलता उसकी अच्छी शुरूआत पर निर्भर करती है। अतः दिन की शुरूआत मंदिर में दर्शन, पूजा व अभिषेक के साथ करें ताकि आपका दिन और जीवन सफल हो सके। आज व्यक्ति दुखी अपने व्यसनों के कारण ही है। यदि हम किसी व्यसन का सेवन कर लेते हैं तो बर्बादी निश्चित है।
णमोकार मंत्र की माला फेरने की अपील
93 वर्षीय श्वेत पिच्छीधारी आचार्य श्री विद्या नंद जी महाराज की दिल्ली में चल रही सल्लेखना की अनुमोदना करते हुए मुनि श्री ने उन्हें महान संत बताया। उनकी उत्कृष्ट समाधि की प्रार्थना करते हुए श्रावकों से णमोकार मंत्र की माला फेरने की अपील की।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
णमोकार मंत्र की माला फेरने की अपील
93 वर्षीय श्वेत पिच्छीधारी आचार्य श्री विद्या नंद जी महाराज की दिल्ली में चल रही सल्लेखना की अनुमोदना करते हुए मुनि श्री ने उन्हें महान संत बताया। उनकी उत्कृष्ट समाधि की प्रार्थना करते हुए श्रावकों से णमोकार मंत्र की माला फेरने की अपील की।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

