धर्म से ही प्रशस्त होता मुक्ति का मार्ग शेल सागर जी



गोटेगाव-मुनि श्री धर्म आपको जन्म भर ही नहीं बल्कि जन्म जन्म जन्म  तक साथ देता है! और मुक्ति  का मार्ग प्रशस्त करता है! विभिन्न द्रष्टातों के माध्यम से कहा मानव शरीर के पर्याय का उदेश्य क्या है यह समझना जरूरी है
   मुनि श्री ने आचार्य श्री विधा सागर जी महाराज द्वारा रचित गाथा का वाचन किया उन्होने कहा शाम के समय सारे पशु पक्षी एक स्थान पर एकत्रित हो जाते है और सुबह अपनी अपनी दिशा मे उड़ जाते है क्या हम भी यही कर रहे है क्या हमारा भी यही उदेश्य है की दिन भर कमाना रात को सो जाना विचार करे क्या  जीवन केवल परिवार के भरण पोषण के लिये मात्र है मुनि श्री ने प्रसंग के जरिये धर्म करने के लिये प्रेरित किया
         संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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