हम तो पूछेंगे......................?

विजय रघुवंशी विद्रोही विदिशा!भारतीय जनता पार्टी एवं विपक्ष में बैठी कांग्रेस दोनों को आज एससी/ एसटी एक्ट गले की हड्डी बन गया है! सामान्य वर्ग, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग एवं दलित वर्ग यह दो चक्की के पाट बनकर सामने आ गए हैं और अब इस जातीय चक्की के दो पाटों के बीच में भाजपा और कांग्रेस पिसती नजर आ रही हैं..? जिस प्रकार से दोनों ही पार्टियों के नेताओं को विरोध का सामना करना पड़ रहा है! अब वह इस मामले में ना कुछ बोल पा रहे हैं और चुप रहते हैं तो विरोध का सामना करना पड़ रहा है...? दोनों ही पार्टियों के नेताओं को जगह-जगह भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है और सामान्य वर्ग पिछड़ा वर्ग इन नेताओं से खुलकर पूछ रहा है कि क्या इस देश में उन्हें कोई अधिकार नहीं है..? आखिर उनके मौलिक अधिकारों का हनन क्यों किया जा रहा है.....? मध्य प्रदेश सरकार के मुखिया शिवराज सिंह जिस प्रकार से खुले मंच से सवर्ण समाज के खिलाफ बोलते नजर आए! उससे सबसे अधिक विरोध प्रदेश में उनका ही हो रहा है तो वहीं विपक्ष में बैठी कांग्रेस भी इस मामले को लेकर चुप्पी साधे रहे और सामान पिछड़ा वर्ग का पक्ष लोकसभा में नहीं रख पाई और भाजपा से समझौता कर इस एक्ट को पास किया! उस कारण से कांग्रेस के खिलाफ भी भारी नाराजगी है! आखिर चंद वोटों के लिए देश में जातीय हिंसा को बढ़ावा क्यों दिया जा रहा है..? सामान्य,पिछड़ा वर्ग के युवा खुलकर नेताओं से पूछ रहे हैं कि आखिर यह काला कानून क्यों लागू किया जा रहा है..? उनके भविष्य को बर्बादी की ओर क्यों धकेला जा रहा है..? आखिर देश में न्यायालय प्रणाली को कमजोर क्यों किया जा रहा है..?अगर देश के सर्वोच्च न्यायालय से ऊपर सरकार और नेता हैं तो इस देश में फिर न्याय के लिए आम आदमी कहां जाएगा...? मैं भी एक सामान्य वर्ग का आम आदमी हूं और प्रदेश सरकार एवं केंद्र सरकार सहित कांग्रेस एवं अन्य दलों से पूछना चाहता हूं कि क्या सामान्य वर्ग सिर्फ इन पार्टियों को वोट देने के लिए ही पैदा हुआ है..? शिवराज सिंह जिस प्रकार से माई के लालों को ललकार रहे हैं उससे यह समझा जा सकता है कि वह सिर्फ दलितों के वोट पर ही अपनी सरकार बनाना चाहते हैं.....? आज मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मति भी दिग्विजय सिंह ऐसी भ्रष्ट हो चुकी है...? कभी प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह ने सार्वजनिक मंच से कहा था उन्हें सामान्य वर्ग के वोट नहीं चाहिए उन की क्या दुर्दशा हुई है आज तक वह  खुद नहीं समझ पा रहे हैं...और आज भी आम जनमानस में दिग्विजय सिंह के खिलाफ भारी विरोध है और उनकी छवि ठीक नहीं है...? अब इसी राह पर शिवराज सिंह चौहान चल रहे है तो उनकी दुर्गति होना भी तय है..?अगर इस मामले पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आगे नेताओं की दुर्गति और बुरी हो सकती है! सार्वजनिक रूप से और ज्यादा विरोध का सामना करना पड़ सकता है! जब प्रदेश के मुखिया पर जूता फेंका जा सकता है तो बाकी नेता गलत फहमी में ना रहे..?

विजय रघुवंशी विद्रोही स्वतंत्र पत्रकार गंज बासौदा

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