बड़े भाई के लिए छोटा भाई कर सकता है राजनीतिक-त्याग

राजनीतिक हलचल-राजनीति में अपना अपने के खिलाफ ही खड़ा हो जाता है । सत्ता के लालच में भाई भाई दुश्मन बन जाते हैं, राजनीति में गैरों से ज्यादा अपनों से कहीं अधिक खतरा रहता है और प्रतिद्वंदता भी अपने ही करते हैं । इस चुनावी कुम्भ में डुबकी लगाने के लिए सगा सगे को ही टाँग अड़ाकर पीछे धकेलने की कोशिश में है लेकिन ऐसे दौर में एक विधायक ऐसे भी हैं जो अपने बड़े भाई के लिए राजनीतिक त्याग करने को तैयार हैं ।

हम बात कर रहे मुरैना जिले की सुमावली विधानसभा से भाजपा के युवा विधायक सत्यपाल सिंह सिकरवार उर्फ नीटू, नीटू अपने बड़े भाई डॉ सतीश सिंह सिकरवार के लिए पीछे हटने के लिए तैयार है । आपको बताते चलें कि सतीश नगर निगम ग्वालियर में एमआईसी सदस्य हैं और वर्तमान में भाजपा की ओर से ग्वालियर शहर की एक विधानसभा से टिकिट की चाहत रखते हैं लेकिन एक परिवार एक टिकिट के कारण पार्टी उन्हें टिकिट शायद ही दे क्योंकि उनके छोटे भाई नीटू वर्तमान में मुरैना जिले की सुमावली विधानसभा से विधायक हैं ऐसे में नीटू अपनी सीट बड़े भाई सतीश के लिए छोड़ने को तैयार है, नीटू को का कहना है कि यदि पार्टी सतीश को टिकिट दे तो वे चुनाव नहीं लड़ेंगे फिर चाहे उनकी सुमावली विधानसभा से पार्टी किसी को भी टिकिट दे ।

एक नज़र उनके परिवार की राजनीति पर

सिकरवार परिवार को देखकर लगता है कि शायद राजनीति उनके लिए ही बनी है या वे राजनीति के लिए ही बने हैं या यूँ कहे कि राजनीति और सिकरवार परिवार एक दूसरे के पर्याय है ।
गजराज सिंह सिकरवार सुमावली विधानसभा से भाजपा विधायक रहे हैं तो गजराज के छोटे भाई वृन्दावन सिंह सिकरवार जौरा विधानसभा से कांग्रेस के टिकिट पर 2008 में चुनाव लड़ चुके हैं वो बात अलग है कि जीत नहीं मिली,इतना ही नहीं कभी मुरैना जिला पंचायत में उपाध्यक्ष रहे वृन्दावन सिंह मुरैना लोकसभा में बसपा की ओर से भाग्य आजमा चुके हैं ।
डॉ सतीश सिंह ग्वालियर नगर निगम में पार्षद हैं तो उनके साथ उनकी पत्नी डॉ शोभा सिकरवार भी भाजपा पार्षद है, इतना ही नहीं सतीश के आशीर्वाद से उनका ड्राइवर भी पार्षद है, सतीश विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद सदस्य भी रहे हैं यानी कॉलेज से लेकर यूनिवर्सिटी तक वो राजनीति करते और सीखते रहे हैं और आज भोपाल जाने के लिए बेताब हैं, निर्विरोध पार्षद बने सतीश का ऐसा जलवा कायम है कि निर्दलीय उम्मीदवार भी रहे तो हाथ,हाथी सहित कमल को चारों खाने चित्त कर सकते हैं ।
नीटू को लेकर कहा जाता है कि कॉलेज से लेकर विधानसभा तक कोई चुनाव नहीं हारे,विधानसभा चुनाव के समय नीटू मुरैना जिला पंचायत अध्यक्ष थे । नीटू और सतीश दोनों गजराज सिंह के बेटे हैं ।
मानवेन्द्र सिंह उर्फ गाँधी जो कि बसपा की ओर से सुमावली विधानसभा से प्रत्याशी बनाए गए हैं वर्तमान में मुरैना जिले पंचायत में उपाध्यक्ष हैं, वृन्दावन सिंह के बेटे हैं । गाँधी के प्रत्याशी घोषित होने से एक बात तो साफ हो गई है कि नीटू सुमावली सीट छोड़ेंगे ही क्योंकि अगर ऐसा नही हुआ तो भाई भाई के बीच राजनीतिक युद्ध तय है और ऐसे में सीट कांग्रेस के लिए सुरक्षित हो जाएगी । वैसे भी इस सीट पर मिथक रहा है कि एक बार भाजपा एक बार कांग्रेस, तो इस बार कांग्रेस की बारी है और यहाँ कांग्रेस नेता इंदल सिंह कंसाना हैं ।
नीटू की हालत अपने विधानसभा में कुछ खास नहीं है इसलिए वे सीट छोड़कर बड़े भाई के लिए टिकिट की दावेदारी मजबूत करने के साथ ही अपनी हार नहीं देखना चाहते हैं।यानी एक तीर से दो निशान लगाना चाहते हैं । बसपा, कांग्रेस और भाजपा से लेकर मुरैना ग्वालियर जिलों में इस परिवार का राजनीतिक दबदबा है ।

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