वन भूमि से अतिक्रमण हटाने पर भड़के माफिया, पत्रकार को दी जान से मारने की धमकी

समस्त पत्रकारों ने एकत्रित होकर कारबाई हेतु पोहरी थाना प्रभारी को सोपा ज्ञापन 

पोहरी क्षेत्र के ग्राम भैसरावन के धतूरिया में वन विभाग द्वारा की गई अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। वन भूमि पर वर्षों से कब्जा जमाए बैठे दबंगों पर जब प्रशासन ने कार्रवाई की, तो बौखलाए अतिक्रमणकारियों ने अब पत्रकार को ही निशाना बनाना शुरू कर दिया।

 6 माह से खबर चला रहे पत्रकार को मिली धमकी

प्राप्त जानकारी के अनुसार न्यूज इंडिया टीवी के रिपोर्टर नितिन राजपूत ने पिछले छह माह से लगातार भैसरावन क्षेत्र में वन भूमि पर हो रहे अवैध कब्जों को लेकर खबरें प्रकाशित की थीं। इसी के चलते 25 अप्रैल 2026 को वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की।

बताया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान कुछ अतिक्रमणकारियों ने वन विभाग के कर्मचारियों का विरोध भी किया और उन्हें मौके से खदेड़ने की कोशिश की।

फोन पर दी गई जान से मारने की धमकी

आरोप है कि ग्राम मोराई निवासी बल्लू गुर्जर और उसका भाई विनोद गुर्जर ने रात करीब 10 बजे पत्रकार नितिन राजपूत को फोन कर गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। आरोपियों ने कहा कि “तेरी वजह से हमारी जमीन हटाई जा रही है, अब गांव में आकर दिखा, जान से खत्म कर देंगे।”

पीड़ित पत्रकार के अनुसार इस धमकी की कॉल रिकॉर्डिंग उनके पास मौजूद है, वहीं घटना के समय भैया काजी भी उनके साथ थे, जिन्होंने पूरी बातचीत सुनी।

पत्रकारों ने एकजुट होकर पोहरी थाना प्रभारी को सौंपा ज्ञापन

घटना के विरोध में क्षेत्र के पत्रकारों में आक्रोश देखा गया। सभी पत्रकार एकजुट होकर पोहरी थाना पहुंचे और थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

पत्रकार संघ ने की कड़ी कार्रवाई की मांग

ज्ञापन सौंपने वालों में श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष धर्मेंद्र शर्मा, भैया काजी, देवेंद्र जैन, प्रदीप गुप्ता, मनोहर शर्मा, पप्पू सिठेले,. योगेंद्र जैन हितेश जैन, विशाल शर्मा लाला चौहान सहित कई पत्रकार मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कहा कि पत्रकारों को धमकाना लोकतंत्र पर हमला है और दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

 पुलिस से निष्पक्ष जांच की अपेक्षा

पत्रकारों ने प्रशासन से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके और पत्रकार सुरक्षित वातावरण में अपना कार्य कर सकें।
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