बिना जांचे ही सोशल मीडिया पर फाॅरवर्ड कर देते हैं खबरें -मुनि श्री अभयसागर

अभिषेक जैन विदिशा-आज तक नहीं अब तक की जितनी खबरें हैं उनको बिना सत्यता की जांच किए वाटस्एप एवं फेसबुक पर तुरंत देने से आप धर्म को बढ़ावा नहीं दे रहे हैं बल्कि उपहास में सहायक बन रहे हैं। उपरोक्त उद्गार मुनि अभय सागर महाराज ने प्रातः कालीन प्रवचन सभा में रत्न करंडक श्रावकाचार की वाचना करते हुए अरिहंत विहार जैन मंदिर में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि जो अज्ञानी हैं एवं उस विषय का ज्ञाता नहीं है यदि उसके सामने किसी भी प्रकार से कोई धर्म की गलत क्रिया रूप समाचार आता है और वह उसकी सत्यता की जांच किए बिना ही तुरंत फॉरवर्ड कर देता है तो वह व्यक्ति धर्म की हानि ही करता है। उन्होंने कहा कि शारीरिक रूप से कमजोर, अशक्त एवं मंदबुद्धि द्वारा उत्पन्न हुई धर्म की गलत क्रिया को छुपाया जाता है ना कि उसे उजागर किया जाता है। उन्होंने कहा कि आजकल तो कोई घटना घटी नहीं कि तुरंत वाटस्एप या फेसबुक पर अपडेट कर देते हो जो कि नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई अज्ञानी है, शारीरिक रूप से कमजोर है। अशक्त एवं बाल मुनि द्वारा की गई धर्म की गलत क्रिया हो जाती हैं तो उसको छुपाते हैं, उसकी निंदा नहीं करते हैं।
उन्होंने कहा कि तीव्र कशाय, कुसंगति, रोग, दरिद्रता मिथ्योपदेश अथवा मिथ्या दृष्टि के चमत्कारिक भुलावों में आकर जो जीव सम्यक दर्शन या सम्यक चरित्र से विचलित हो जाते हैं अथवा विचलित हो रहे हों तो उन्हें पुनः उसी स्थिति में सुस्थिर, सुदृढ़ करना ही स्थितिकरण अंग कहलाता है।
इस दौरान उन्होंने कहा कि जैसे किसी मरीज की ज्यादा हालत खराब होती है तभी उसे आकस्मिक चिकित्सा हेतू गहन चिकित्सा कक्ष में रखा जाता है। वहां पर किसी को आने की इजाजत नहीं होती है क्योंकि अज्ञानता बस क्रियाओं से उस मरीज का नुकसान हो सकता है।
उसी प्रकार यदि किसी की रत्नत्रय धारी की संलेखना चल रही है और कोई जाकर उसके रत्नत्रय की प्रशंसा न कर उसके शारीरिक कमजोरियों को प्रगट करता है तो वह उचित नहीं है। इससे वह जीव अपने परिणामों को स्थिर किए था उससे अलग भी हो सकता है। उपरोक्त जानकारी श्री सकल दिगंबर जैन समाज के प्रवक्ता अविनाश जैन ने दी।
अरिहंत विहार जैन मंदिर में मुनि अभय सागर महाराज ने प्रात:कालीन प्रवचन में कहा-
   

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