*-आईसीयू में भर्ती घायलों ने लगाए जानलेवा हमले और जातिसूचक टिप्पणी के आरोप, घायलों की हालत गंभीर, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल*
करैरा/शिवपुरी। करैरा नगर के प्रसिद्ध बगीचा मंदिर परिसर में हुए खूनी विवाद के बाद मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। घटना में घायल लोग अभी भी ग्वालियर में उपचाररत हैं और कुछ की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। वहीं घटना का लाइव कवरेज कर रहे पत्रकार अखिलेश दुबे पर भी हमला किए जाने का आरोप सामने आया है। पूरे मामले को लेकर धार्मिक स्थल की गरिमा, पुलिस कार्रवाई और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पीडि़तों ने शिवपुरी पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाते हुए परिवार की सुरक्षा की मांग की है। सूत्रों के अनुसार मंदिर परिसर में हुई हिंसा कोई सामान्य विवाद नहीं बल्कि पूर्व नियोजित हमला भी हो सकता है। जिस प्रकार से एक ही पक्ष के लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, उससे यह चर्चा तेज हो गई है कि पीडि़त पक्ष निहत्था था और उन्हें किसी बड़े विवाद की आशंका तक नहीं थी।
*लाइव कवरेज कर रहे पत्रकार पर हमला*
घटना के दौरान मौके पर मौजूद नए पन्ने के प्रधान संपादक एवं पत्रकार अखिलेश दुबे ने आरोप लगाया है कि जब वह मंदिर परिसर में चल रही घटना का लाइव कवरेज कर रहे थे, उसी दौरान उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने बताया कि उनके हाथ में फ्रैक्चर आया है तथा उनका मोबाइल फोन भी छीन लिया गया।
अखिलेश दुबे का आरोप है कि बगीचा मंदिर के महंत राजेन्द्र गिरी एवं उनके समर्थकों ने लाठी-डंडों से हमला किया। पत्रकार पर हुए हमले के बाद स्थानीय पत्रकारों में भी रोष व्याप्त है।
*आईसीयू में भर्ती घायल नीलेश दुबे ने लगाए गंभीर आरोप*
घटना में गंभीर रूप से घायल नीलेश दुबे वर्तमान में ग्वालियर के अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं। उन्होंने उपचार के दौरान बताया कि 8 तारीख की रात लगभग 9.30 बजे वह अपने भाई के साथ मंदिर दर्शन के लिए गए थे। नीलेश दुबे के अनुसार, हमें देखते ही राजेन्द्र गिरी महाराज गाली-गलौज करने लगे। विरोध करने पर उनके साथ मौजूद दो लोगों ने अचानक हमला कर दिया। तलवार और कुल्हाड़ी से हमला किया गया, जिससे सिर में गंभीर चोट आई। उन्होंने आरोप लगाया कि हमला जानलेवा था और परिवार भय के माहौल में है। उन्होंने एएसपी शिवपुरी से निष्पक्ष वैधानिक कार्रवाई की मांग करते हुए सुरक्षा उपलब्ध कराने की अपील की है। नीलेश दुबे ने यह भी आरोप लगाया कि महंत राजेन्द्र गिरी पर पूर्व से गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस द्वारा नहीं की गई है।
*जातिसूचक टिप्पणी का भी आरोप*
घायल कालीचरण जाटव, जो वर्तमान में ग्वालियर में उपचाररत हैं, ने आरोप लगाया कि जब वह मंदिर में दर्शन करने पहुंचे तो विवाद के दौरान उन्हें जातिसूचक शब्द कहे गए। कालीचरण जाटव के अनुसार, हमें मंदिर में जाने से रोका गया और कहा गया कि इस चमार को क्यों लेकर आए हो। बाद में महाराज के चेलों ने बाहर निकाल दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब वह रिपोर्ट दर्ज कराने थाने पहुंचे तो उनकी शिकायत नहीं लिखी गई और उन्हें भगा दिया गया।
*मोबाइल गायब, हमले की साजिश की चर्चा*
घटना के बाद यह भी चर्चा है कि घायलों के मोबाइल फोन अब तक बरामद नहीं हुए हैं और वे कथित रूप से दूसरे पक्ष के लोगों के पास हैं। सूत्र बताते हैं कि मंदिर समिति से जुड़े लोग पहले महंत के करीबी माने जाते थे। बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले समिति अध्यक्ष भोला उर्फ राजेश दुबे ने मंदिर परिसर में महंत के लिए एसी तक लगवाया था। ऐसे में अचानक हुए हिंसक हमले ने पूरे घटनाक्रम को संदेहास्पद बना दिया है।
*कानून हाथ में लेना गलत*
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि महंत या मंदिर पक्ष को किसी प्रकार की आपत्ति थी तो उन्हें पुलिस प्रशासन की सहायता लेकर वैधानिक रास्ता अपनाना चाहिए था। धार्मिक आस्था के केंद्र माने जाने वाले स्थल पर खुलेआम लाठी, डंडे और धारदार हथियारों से हमला होने से लोगों में आक्रोश है।
*वायरल वीडियो के बाद बढ़ा दबाव*
उल्लेखनीय है कि बगीचा मंदिर परिसर में हुई मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया, लेकिन आरोप है कि अब तक मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। घटना में सेवा समिति अध्यक्ष भोला उर्फ राजेश दुबे सहित कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका उपचार ग्वालियर में जारी है। फिलहाल पूरे मामले में पुलिस की आगामी कार्रवाई और प्रशासन की भूमिका पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
