धर्म का विज्ञान प्राचीनता को मानता है, जवकि आधुनिक विज्ञान लेटेस्ट को मानता मुनि श्री

 विदिशा-धर्म का विज्ञान प्राचीनता को मानता है, जबकि आधुनिक विज्ञान लेटेस्ट को मानता मुनि समता सागर जी महाराज ने प्रातःकालीन जैन तत्व बोध की कक्षा में युवकों को सम्बोधित करते हुए कहे
  उन्होंने कहा  आज का वैज्ञानिक पुराने वैज्ञानिकों की रिसर्च को गलत सावित कर सकता है किन्तु धर्म के क्षेत्र में प्राचीन धर्म ग्रन्थों के सिद्धांतों को गलत सावित नहीं कर सकता यही कारण है कि धर्म के सिद्धान्त स्थाई औऱ शाश्वत है जबकि वैज्ञानिक दुनिया की खोज बदलती रहती है

    मुनि श्री ने आगे कहा कि धर्म ग्रन्थों को बदलने का किसी को भी अधिकार नहीं है,जबकि  धर्म ग्रन्थों को पढ़कर अपने जीवन को बदलने का अधिकार सभी को है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जो भी अपने समय का सदुपयोग करेगा वह अपने जीवन का तो उद्धार करेगा ही  साथ ही प्रकृति कृत बीमारी से भी बच जाऐगा।
    इस अवसर पर ऐलक श्री निश्चयसागर जी महाराज ने कुंद "कुंद के कुंदन" जो कि आचार्य श्री विद्यासागरजी महाराज का पद्धानुवाद है, उसकी वांचना करते हुये कहा कि जो अधिकार संयम लेंने के मनुष्यों को है, धह अधिकार तो स्वर्ग के देवताओं को भी नहीं है। उन्होंने कहा कि आप लोगों ने पंचकल्याणक के अवसर पर देखा होगा कि किस प्रकार मनुष्यों और देवताओं मे भगवान की पालकी उठाने को लेकर विवाद होता है, लेकिन संयम लेने वाले मनुष्यों की जीत होती है। चतुर्गति जीवों में सम्यज्ञ दर्शन प्राप्त करने की योग्यता रहती है, उन्होंने उदाहरण देते हुये कहा कि तीर्थंकर महावीर भगवान ने सिंह की पूर्व पर्याय में दो मुनिराजों से सम्यक दर्शन प्राप्त किया था।
      संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमंडी

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.