राजनीतिक हलचल-एक जमाने में ग्वालियर रियासत हुआ करती थी और मुखिया थे सिंधिया राजवंश, आज़ादी के बाद लोकतंत्र तो आ गया लेकिन ग्वालियर अंचल में सिंधिया परिवार का रसूख कायम रहा यही कारण है कि ग्वालियर अंचल की राजनीति में सिंधिया परिवार की तीन पीढ़ियों ने विधानसभा से लेकर संसद की देहरी चढ़ी है ।
ग्वालियर लोकसभा से एक लंबे समय से महल का प्रत्याशी नहीं रहा लेकिन इस बार जीत महल की ही होगी । वर्तमान सांसद नरेंद्र सिंह तोमर के मुरैना जाने के बाद इसकी संभावना और बढ़ गई है । कांग्रेस की ओर से फायर ब्रांड नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया या फिर उनकी धर्म पत्नी को प्रत्याशी बनाये जाने की मांग स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने आलाकमान से की है ऐसे में संभावना है कि इन दोनों में से किसी एक का आना तय माना जा रहा है और ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना से ही चुनाव लड़ते हैं और प्रियदर्शिनी के चुनाव न लड़ने की स्थिति में कांग्रेस सिंधिया की सलाह पर ही प्रत्याशी उतारेगी, तब महल की परिक्रमा करने वाले किसी कांग्रेसी को इसका फायदा मिल सकता है, खबर है कि दो बार से चुनाव हार चुके अशोक सिंह के पक्ष में प्रदेश कांग्रेस के अन्य बड़े नेता तो हैं लेकिन सिंधिया किसी भी तरह से ग्वालियर का किला भाजपा से छीनना चाहते हैं, सूत्रों के मुताबिक सिंधिया महल के करीबी व्यक्ति को मैदान में भेजने की तैयारी कर चुके हैं ताकि यह कहकर मतदाता को लुभाया जा सके कि प्रत्याशी स्वंय सिंधिया ही है ।
उधर भाजपा के अंदरखाने से खबर मिल रही है कि नरेन्द्र सिंह के मुरैना जाने के बाद ग्वालियर सीट पर भाजपा के लिए संकट के बादल मंडरा रहे हैं क्योंकि संघ की ओर से ग्वालियर महापौर विवेक नारायण शेजवलकर का नाम आ रहा है तो तोमर के मुरैना जाने के बाद अनूप मिश्रा के ग्वालियर से लड़ने के कयास लगाये जा रहे हैं, उधर तोमर के करीबी माने जाने वाले साडा अध्यक्ष जय सिंह कुशवाहा का नाम भी सामने आ रहा है । विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक भाजपा ग्वालियर सीट को किसी भी कीमत पर जितना चाहती है ऐसे में उसे महल का प्रभाव होने के कारण सिर्फ महल के व्यक्ति पर ही जीत का भरोसा है, ऐसे में यशोधरा राजे सिंधिया या फिर उनकी मामी माया सिंह का नाम भी सामने आ रहा है ।
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही ग्वालियर की चुनावी वैतरणी पार करने के लिए जय विलास पैलेस और रानी महल के भरोसे हैं, जय विलास पैलेस से कांग्रेस प्रत्याशी आता है भाजपा को कांग्रेस के नाराज दावेदारों का समर्थन हासिल हो सकता है, हर हाल में जीत तो महल की होगी ।
ग्वालियर लोकसभा से एक लंबे समय से महल का प्रत्याशी नहीं रहा लेकिन इस बार जीत महल की ही होगी । वर्तमान सांसद नरेंद्र सिंह तोमर के मुरैना जाने के बाद इसकी संभावना और बढ़ गई है । कांग्रेस की ओर से फायर ब्रांड नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया या फिर उनकी धर्म पत्नी को प्रत्याशी बनाये जाने की मांग स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने आलाकमान से की है ऐसे में संभावना है कि इन दोनों में से किसी एक का आना तय माना जा रहा है और ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना से ही चुनाव लड़ते हैं और प्रियदर्शिनी के चुनाव न लड़ने की स्थिति में कांग्रेस सिंधिया की सलाह पर ही प्रत्याशी उतारेगी, तब महल की परिक्रमा करने वाले किसी कांग्रेसी को इसका फायदा मिल सकता है, खबर है कि दो बार से चुनाव हार चुके अशोक सिंह के पक्ष में प्रदेश कांग्रेस के अन्य बड़े नेता तो हैं लेकिन सिंधिया किसी भी तरह से ग्वालियर का किला भाजपा से छीनना चाहते हैं, सूत्रों के मुताबिक सिंधिया महल के करीबी व्यक्ति को मैदान में भेजने की तैयारी कर चुके हैं ताकि यह कहकर मतदाता को लुभाया जा सके कि प्रत्याशी स्वंय सिंधिया ही है ।
उधर भाजपा के अंदरखाने से खबर मिल रही है कि नरेन्द्र सिंह के मुरैना जाने के बाद ग्वालियर सीट पर भाजपा के लिए संकट के बादल मंडरा रहे हैं क्योंकि संघ की ओर से ग्वालियर महापौर विवेक नारायण शेजवलकर का नाम आ रहा है तो तोमर के मुरैना जाने के बाद अनूप मिश्रा के ग्वालियर से लड़ने के कयास लगाये जा रहे हैं, उधर तोमर के करीबी माने जाने वाले साडा अध्यक्ष जय सिंह कुशवाहा का नाम भी सामने आ रहा है । विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक भाजपा ग्वालियर सीट को किसी भी कीमत पर जितना चाहती है ऐसे में उसे महल का प्रभाव होने के कारण सिर्फ महल के व्यक्ति पर ही जीत का भरोसा है, ऐसे में यशोधरा राजे सिंधिया या फिर उनकी मामी माया सिंह का नाम भी सामने आ रहा है ।
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही ग्वालियर की चुनावी वैतरणी पार करने के लिए जय विलास पैलेस और रानी महल के भरोसे हैं, जय विलास पैलेस से कांग्रेस प्रत्याशी आता है भाजपा को कांग्रेस के नाराज दावेदारों का समर्थन हासिल हो सकता है, हर हाल में जीत तो महल की होगी ।
