आत्मा पवित्रता काअनुभव करे समय सागर जी महाराज




रहली-पाप को धोने के लिये जिस पुण्य का आलंबन लिया है तो तो पुण्य से प्राप्त वस्तुओ और साधनो का त्याग करना चाहिये यह आशीर्वचन मुनि श्री समय सागर जी महाराज ने प्रवचन सभा के दोरान कहे उन्होने बताया मनुष्य को देव पर्याय पुण्य से मिलती है देव राग द्वेष पूर्वक वैभव पर्याय को भोगता है किन्तु देवो की भी म्रत्यु होती है
        म्रत्यु के 6 माह पूर्व गले की माला जब मुरझाने लगती है तब वो देव भावो को निर्मल कर त्याग करना शुरू कर देता है वही  मोक्षमार्गी बन जाता है इस तरह आत्मा जब पुण्य का अनुभव करे वह पुण्य का योग है
       संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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