सम्मेद शिखर 20 तीर्थंकरों की निर्वाण कल्यणक भूमि है, यहां की कण-कण पवित्र है : चैतन्यमती माताजी

 पारसनाथ-शाश्वत तीर्थ सम्मेद शिखर के दिगम्बर जैन त्रियोग आश्रम में भक्तामर  महामंडल विधान के चौथे दिन बुधवार को कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। त्रियोग  आश्रम में विराजमान आचार्य श्रीसंभव सागर जी महाराज एवं आर्यिका 105चैतन्यमती  माताजी के सानिध्य में चल  रहे कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए आर्यिका 105चैतन्यमती  माताजी ने   भक्तामर महामंडल  के बारे में विस्तार पूर्वक जानकारी दी एवं विधान कराने की प्रेरणा दी। उन्होने कहा  कि सम्मेद शिखर 20 तीर्थंकरों की निर्वाण कल्यणाक भूमि है। यहां का कण-कण  पवित्र है। ऐसे तीर्थ भूमि में भक्तामर महामंडल विधान का आयोजन होना बड़े  ही हर्ष की बात है।मांगतुंग आचार्य के द्वारा एक-एक भक्तामर मंत्र गाथा की  रचना करते एक आचार्य के ऊपर जो अड़तालीस बेड़ी से जकड़ा गया था उसी बेड़ी  से एक एक बेडी टूटता गया और अंत में जब सभी 48 गाथा प्रस्तुत की  और  अड़तालीस ताले की बेड़ी भी टूट गयी एवं आचार्य बेड़ी से बाहर हो गए। उसी समय से  भक्तामर का 48 गाथा प्रस्तुत किया जाता है। 
          संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया  रामगंजमंडी

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