बांसवाड़ा -आचार्य श्री पुलक सागर जी महाराज ने कहा जीवन थोड़ी देर का है, पता नही कब किस ववत यहां से विदा हो जाना पड़े। क्योकि यदि सुबह हुई है तो शाम भी होगी और शाम के बाद रात भी अंधकार के साथ आएगी।
नींद भी आएगी, सपने भी आएंगे और फिर हम सपनो में खो जाएगे। उन्हें अपना सब मान लेगे, लेकिन नींद खुलते ही मधुर सपने टूट जाएगे। उन्होंने कहा जन्म और मृत्यु के बीच ज्यादा अंतर नही है। उठो, जागो सपनो मे ही मत खोए रहो। सोए सोए व्यर्थ में अपना जीवन मत गवा दो।जो वास्तविक सौंदर्य से परिचित नहीं हो पाते, वह जीवन के वास्तविक रहस्य को जानने से वंचित रह जाते हैं। उनके जीवन में सिवाय आंसुओ के अतृप्त वासनाओं के असंतोष के और विवाद के अलावा कुछ शेष नही रहता। जगा हुआ मानव ही कुछ पा सकता है। जीवन बहुत छोटा है,इसीलिए अपनी चिन्मय आत्मा को प्राप्त करने का पुरुषार्थ करो।
उन्होंने कहा यदि अज्ञान भटका सकता है तो सुज्ञान मार्ग भी दिखा सकता है। यदि हम बिगड़ सकते है तो सुधर भी सकते है। सिर्फ अंधकार ने ही हमे भड़काया हो ऐसी बात नही है, लेकिन हम लोग प्रकाश मे भी भटक गए है। उजाले मे गुमराह हो गए है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमंडी
