कुंडलपुर: 80 प्रतिशत काम हो गया है पूरा, शिखर के काम में आई तेजी, आचार्यश्री के सानिध्य में हो सकता है पंचकल्याणक

कुंडलपुर: -जिला मुख्यालय से 36 किमी दूर दमोह-पटेरा मार्ग पर स्थित जैन तीर्थ क्षेत्र कुंडलपुर में बड़े बाबा के मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। राजस्थान से आए कारीगर मंदिर को अंतिम रूप देने में लगे हैं। अब तक करीब 80 प्रतिशत काम हो गया है। सबसे प्रमुख मंदिर की शिखर है। जिसे कंपलीट करने के लिए बड़ी-बड़ी मशीनें लगाईं गईं हैं। इन मशीनाें के जरिए तराशे हुए पत्थर शिखर पर पहुंचाए जा रहे हैं। क्योंकि इस मंदिर की शिखर अब तक के जैन मंदिरों में सबसे बड़ी होगी है। ख़ुशी की बात यह है कि मंदिर के काम में तेजी को देखते हुए पंचकल्याणक के संयोग भी बन रहे हैं। संभवता आने वाले दिनों में यहां पर आचार्यश्री विद्यासागर महाराज के सानिध्य में महोत्सव हो सकता है।
अक्षरधाम की तरह दिखेगा मंदिर
कुंडलपुर मंदिर की ऊंचाई मध्यप्रदेश का सबसे ऊंचाई वाला मंदिर होगा। इसे 2021 में कंपलीट होना है। इसकी डिजाइन और ड्राइंग अक्षरधाम की तरह होगी। मंदिर के विकास जैन ने बताया कि बड़े बाबा के मंदिर की शिखर की ऊंचाई अब तक के मंदिरों से भी बड़ी 189 फीट है और यह मंदिर नागर शैली का है। इस तरह का मंदिर देश में अब तक नहीं है। पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर की शिखर, गुण मंडप और नृत्य मंडप बनाने का काम अंतिम दौर में है। इसकी बनावट अद्भुत है। पूरे मंदिर के निर्माण में लोहा, सरिया और सीमेंट का उपयोग नहीं है। मंदिर की उम्र लंबी हो, इसके लिए उसे पूरी तरह से पत्थरों से ही तराशा जा रहा है। श्री जैन ने बताया कि जो पत्थर लगाए जा रहे हैं। उन्हें एक दूसरे से जोड़ा जा रहा है। इससे मंदिर की पहचान कई सदी तक बनी रहेगी। वर्तमान में मंदिर का काम पूरा करने के लिए 5 सौ से ज्यादा कारीगर बुलाए गए हैं। 10 क्रेन मशीनें लगीं हैं। जिनसे नक्काशी के बाद पत्थरों को मंदिर की शिखर पर पहुंचाया जा रहा है। यह मंदिर बनने के बाद तीर्थ क्षेत्र देश के नक्शे पर और भी प्रमुखता से उभरकर सामने आएगा। मंदिर निर्माण को लेकर सकल जैन समाज द्वारा बढ़-चढ़कर सहयोग किया जा रहा है।

नागर शैली में देश का सबसे ऊंचा मंदिर होगा दमोह का कुंडलपुर तीर्थ-एक दूसरे से जोड़ा जा रहा है। इससे मंदिर की पहचान कई सदी तक बनी रहेगी। वर्तमान में मंदिर का काम पूरा करने के लिए 5 सौ से ज्यादा कारीगर बुलाए गए हैं। 10 क्रेन मशीनें लगीं हैं। जिनसे नक्काशी के बाद पत्थरों को मंदिर की शिखर पर पहुंचाया जा रहा है। यह मंदिर बनने के बाद तीर्थ क्षेत्र देश के नक्शे पर और भी प्रमुखता से उभरकर सामने आएगा। मंदिर निर्माण को लेकर सकल जैन समाज द्वारा बढ़-चढ़कर सहयोग किया जा रहा है।
         संकलन अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.