योगेंद्र जैन पोहरी- : कोरोना से भारत ही नहीं पूरा विश्व त्राहि त्राहि मचा रहा है, पहली लहर में कोरोना को समझ पाते इससे पहले ही उसने अपना कहर बरपाना शुरू कर दिया था, सरकार और स्वास्थ्य विभाग अपने घुटने टेक चुका था, लोकडाउन ही उसका एकमात्र उपाय निकला जिसे जनता ने पूरी शिद्दत से स्वीकारा, वहीं दूसरी लहर के लिए सरकारों और स्वास्थ्य विभाग के तमाम इंतजामों के बाद भी कोरोना ने कई लोगों से उनके परिजनों को छीन लिया, चारों तरफ ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मची हुई थी तो रेमेडिसिवर के लिए लोगों को मैराथन दौड़ लगाते भी देखा गया, भले ही ब्लैक में उच्च कीमतों पर ही क्यों न खरीदना पड़ रहा था । अब एक बार फिर तीसरी लहर की आशंका भी जताई जा रही है और इससे दो दो हाथ करने सरकार तमाम दावे कर रही है लेकिन ये कितने कामगार साबित होंगे ये तो तीसरी लहर के प्रकोप के आ जाने के बाद ही पता चल पाएगा , सरकार की ओर से कोरोना गाइडलाइंस जारी की गई है जिसमें धारा 144 का पालन करने के लिए जनता को हिदायत दी गई है और प्रशासन को कड़ाई से पालन कराने के लिए भी कहा गया है लेकिन जारी गाइडलाइंस जनता के लिए ही है या फिर शासन प्रशासन और आम आदमी सबके लिए है इसका कहीं जिक्र नहीं है ।
*दो - दो गाइडलाइंस-सरकार की तरफ जारी गाइडलाइन हालांकि एक ही है लेकिन जमीनी स्तर पर ये दो प्रकार की दिखाई देती है और सत्ता पक्ष के लिए अलग और विपक्ष के साथ आम आदमी के लिए अलग गाइडलाइन को प्रशासन लागू कराते साफ दिखाई दे रहा है । अभी हाल ही में जारी गाइडलाइन में कहा गया कि गणेश स्थापना बड़े स्तर पर न करते हुए, सीमित लोगों की संख्या में खुले स्थान पर प्रतीकात्मक रूप से की जाए, इसके अलावा किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजन, राजनीतिक रैली और सभा की अनुमति नहीं है, इसके अलावा विद्यालय और महाविद्यालय में भी पचास फीसदी उपस्थिति के साथ कक्षाओं के संचालन की अनुमति होगी लेकिन भारतीय जनता पार्टी और उनकी सरकारों के आगे ये गाइडलाइंस के कागज रद्दी बन जाते हैं और कोरोना प्रदेश ही नहीं लेकिन देश छोड़कर भाग जाता है । हाल ही में ग्वालियर अंचल में विपक्ष कांग्रेस के द्वारा भितरवार विधानसभा क्षेत्र में बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत राशि की माँग करते हुए एसडीएम को ज्ञापन सौंपा तो क्षेत्रीय विधायक लाखन सिंह यादव सहित दो सैकड़ा से अधिक लोगों पर कार्यवाही की गई,वहीं दूसरी तरफ ग्वालियर नगर निगम में व्याप्त समस्याओं को लेकर विधायक सतीश सिंह सिकरवार द्वारा आंदोलन की अनुमति मांगी गई तो अनुमति नहीं मिली और गैर अनुमति के आंदोलन करने पर कार्यवाही की गई । लेकिन जब बात भारतीय जनता पार्टी की आती है तो कोरोना गाइडलाइन प्रशासन के बाबुओं की जेब में धरे रह जाते हैं, बीते दिनों केंद्रीय मंत्रीद्वय ज्योतिरादित्य सिंधिया और बीरेंद्र खटीक की जनआशीर्वाद यात्रा में एकत्रित भीड़ पर प्रशासन आँखें बंद कर बैठा रहा तो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जनदर्शन यात्राओं में उमड़ रही भीड़ पर कोरोना प्रदेश छोड़ भाग खड़ा हुआ है, इसके अलावा जिस क्षेत्र में विपक्षी दल कांग्रेस के विधायकों पर गाइडलाइन के नाम पर कार्यवाही होती हैं बल्कि प्रशासन एक बार फिर सत्ता पक्ष के आगे दुम हिलाते दिखाई दे जाता है । सवाल यही है कि क्या तमाम नियम और कायदे सिर्फ विपक्ष के साथ साथ आम आदमी के लिए ही है, क्या भारतीय जनता पार्टी के नेता भगवान से बड़े हैं, और क्या यही है भारतीय संविधान में वर्णित लोकतांत्रिक व्यवस्था में समानता का अधिकार जहाँ पक्ष के लिए कुछ और तो विपक्ष के लिए कुछ और, या फिर आम आदमी राजनीतिक महत्वाकांक्षी नेताओं से हमेशा ही ठगा जाएगा ।
