न कुछ अच्छा है न बुरा प्रमाण सागर जी

 मधुबन -गुणायतन परिसर में शनिवार की मंगल बेला में उदबोधन देते हुए मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा न कुछ अच्छा है न बुरा है। उन्होनें एक श्लोक का भावार्थ बताते हुए कहा कि वस्तु के स्वरूप को पहचानो, आत्मा अच्छी है न बुरी यह दृष्टि रखो। जो है उसे सहज स्वीकार करो तो जीवन धन्य हो जाएगा। जो  किसी से नफरत नही करता है, वह योगी निर्विकल्प सम्यकदृष्टि है। सब मे समता भाव रखो। छहढाल की पंक्तियों के माध्यम से बताया 
अरिं मित्र महल मसान कंचन 
काच निन्दन धुतिकरन 
अर्घावतरण असि प्रहारण 
 मैं सदा समता धरण
    जो कभी अधिनत्व नही रहता सदा समता धारण करता है,जिसके जीवन मे थोड़ी सी भी मलिनता नही है, वहीं निर्मलता है। उन्होंने सीख देते हुए कहा किसी का बुरा मानना बन्द करो,व्यक्ति से नही व्यक्ति से बुराई  बुराई रखो। किसी से विद्वेष पूर्ण सबंध मत रखो।कोई कितना भी बुरा करे उससे सुरक्षित दूरी रखे। द्वेष मत रखे।
    उन्होंने कहा पापी भी पावन बन सकता है,व्यक्ति से नही उसके पापा से बचो।अंजन चोर का उदाहरण दिया, अंजन भी निरंजन हो गया। व्यक्ति जीवन सुधार लेता है। जीवन उद्धार कर लेता है, वह उद्धार उसकी पहचान बन जाता है। और पहचान बदलकर व पतित से पावन बन जाता है।
 उन्होंने कहा सोचो मत भटकाव से बचो। हर सन्त का कृतित्व होता है, हर अपराधी का भविष्य होता है। रामचन्द्र जी का उदाहरण दिया कहा उन्होंने रावण से अंत तक द्वेष नही रखा सदभाव रखा। प्रेम रखे न रखे द्वेष मत रखे। आत्म तत्व को पहचानो द्वेष नही है तो जीवन मे आंनद है। उन्होंने कहा नफरत  दुर्बलता है, जो हमे संकीर्ण बनाती है। चंचल मन को संस्कारित करना हमारा पुरुषार्थ है।
     अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमंडी की रिपोर्ट

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