गोटेगांव -स्वरकोकिला आर्यिका श्री पूर्णमति माताजी द्वारा ज्ञानधारा पुस्तक वाचन करते हुए कहा कि सामान्य रूप से माँ के संस्कारों का प्रभाव शिशु पर पड़ता है। लेकिन जब कोई महान पुण्य जन्म लेता है तो शिशु की पवित्र भावनाओ का प्रताप जननी की देह पर स्पष्ठ दिखने लगता है।
आर्यिका श्री ने आचार्य श्री के जन्म का प्रसंग सुनाया
आर्यिका माताजी ने आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के जन्म का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि विद्याधर के गर्भ मे रहने पर उनकी माँ आंख बंद कर विचार करती है बेटा और बेटी हो कोई फर्क नही पड़ता क्योकि देह को नही आत्मा को देखना है। देहाक्रति को देह के अंदर वैदेही चेतना को निखारना है। सचमुच ऐसी पवित्र इष्ट को वर्तमान में सारे जगत को अपनाना चाहिए। ताकि बेटा बेटी में होने वाले फर्क को दूर किया जा सके। आर्यिका माताजी ने विद्याधर के माता पिता के बीच चलने वाले वार्तालाप को विस्तार से बताया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
आर्यिका श्री ने आचार्य श्री के जन्म का प्रसंग सुनाया
आर्यिका माताजी ने आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के जन्म का प्रसंग सुनाया। उन्होंने कहा कि विद्याधर के गर्भ मे रहने पर उनकी माँ आंख बंद कर विचार करती है बेटा और बेटी हो कोई फर्क नही पड़ता क्योकि देह को नही आत्मा को देखना है। देहाक्रति को देह के अंदर वैदेही चेतना को निखारना है। सचमुच ऐसी पवित्र इष्ट को वर्तमान में सारे जगत को अपनाना चाहिए। ताकि बेटा बेटी में होने वाले फर्क को दूर किया जा सके। आर्यिका माताजी ने विद्याधर के माता पिता के बीच चलने वाले वार्तालाप को विस्तार से बताया।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

