अभिषेक जैन रामगंजमंडी-विश्व वंदनीय आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री विनीत सागर जी महाराज ने कहा कि धर्म थोपने की वस्तु नही, धर्म श्रद्धा से आता है उन्होंने मुनि का स्वरूप बताते हुए श्रावको के कर्तव्यों के प्रति ध्यान आकृष्ठ किया।उन्होंने कहा सच्चे गुरु वही है जो आत्म कल्याण मे लगे हुए हैं।
मध्यान्ह मे भक्तामर स्तोत्र की कक्षा को प्रारंभ करते हुए मुनि श्री चंदप्रभ सागर जी महाराज ने कहा चमत्कार हमारी श्रद्धा मे जिनप्रतिमा मैं नही, हम श्रद्धा का भाव रखते भक्ति करते है तो हमे चमत्कार दिखाई देता है, उन्होंने कहा यह भक्ति का ही परिचायक है। नगर आगमन से पूर्व चित्तौड़ की संभावना व्यक्त की जा रही थी लेकिन 8 दिनों मैं 200 km का पद विहार कर रामगंजमंडी आना, यह भक्ति का ही परिचायक है।यह श्रद्धा भाव का परिचायक है।
इन दिनों नगर मे भक्ति का वातावरण बना हुआ है ।युवा बच्चे सभी श्रावक जन सुबह से ही मुनि संघ की चर्या एवम ज्ञान गंगा मे डुबकी लगा रहे है।
धर्म थोपने की वस्तु नही-मुनि श्री विनीत सागर जी
0
Tuesday, July 31, 2018
Tags