अतुल जैन बामौर कलां-देश के प्रधानमंत्री हर गांव को स्वच्छ बनाने एव तालाबो की सफाई हेतु अभियान चलकर स्वछता का संदेश देश वासियो को दे रहे है पर धरातल पर तो यहां अभियान अधिकारियो की मनमानी की भेंट चढ़ा गया है । बारिश से पूर्व तालाव के गहरीकरण से लेकर साफ सफाई पर सरकार व शासन करोड़ रुपये खर्च कर रहा है ।
बात की जाये बामौर कलां का तालाब अपने अतीत को खोजता नजर आ रहा है। बीच बस्ती में बने से तालाब को अतिक्रमण करियो ने आने कब्जे में ले लिया है पर प्रशासन कारवाई करने की जगह सोता हुआ नजर आ रहा है । तालाव की सफाई की बात छोड़ो नाली न होने से गटर का पानी तालाब में जा रहा जिससे तालाब का पानी दूषित हो रहा है इसका मुख्य कारण प्रशासन की लाफ़र बाई की बाजे से बस्ती के लोगो ने अब कूड़ा दान समझ सारी गंदगी उसमे डाल रहे दुकानदार पुराने जूते चप्पल कटिंग बाले बाल फेंक रहे यहां तक कि मरे हुये जानवर भी डाले जा रहे है तालाब के बदबूदार पानी अन्य स्रोतों में भी आ रहा है जिसे बहुत से गभीर बीमारियां क्षेत्र में पनपने लगी है ।इस तालाब के मरम्मत और सौन्दर्यकरण के लिये सोमवार को आये मुख्यमंत्री को बामौर कलां के प्रतिनिधि मंडल ने एक ज्ञापन डॉ राघवेंद्र शर्मा अध्यक्ष बाल संरक्षण आयोग के नेतृत्व में दिया देखते है क्या कार्यवाही होती है।जनप्रतिनिधियो की बेरुखी के चलते तालाब अस्तित्व अब खतरे में नजर आ रहा है
बामौर कलां तालाव बन गन्दगी का अम्बार,प्रशासन की अनदेखी कागजो में दम तोड़ रहे है स्वच्छ भारत अभियान
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Wednesday, August 01, 2018
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