कांग्रेस गुना-ग्वालियर तो भाजपा ग्वालियर-मुरैना में उलझी



राजनीतिक हलचल- लोकसभा चुनाव के मतदान की काउंट डाउन शुरू होते ही टिकिट वितरण की रस्साकशी हो रही है । एक सीट पर दर्जनों दावेदार हैं और बड़े नेता अपने सिपसलाहकारों को टिकिट दिलाने की कोशिश कर रहे हैं, ये हालात किसी एक दल के नहीं बल्कि सभी दलों के है । भाजपा और कांग्रेस किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं उठाना चाहती हैं ऐसे में एक एक सीट पर प्रत्याशी चयन में फूँक फूँक कर कदम उठा रही है ।
बात कांग्रेस की करें तो कांग्रेस ग्वालियर और गुना दोनों ही जगह उलझी हुई है, वैसे तो गुना सिंधिया परिवार की परंपरागत सीट मानी जाती रही है और वर्तमान में ज्योतिरादित्य सिंधिया यहाँ से सांसद हैं लेकिन पिछोर विधायक केपी सिंह के मंत्री न बनाये जाने पर सिंधिया का विरोध होना लाजमी है और इसके अलावा सिंधिया का अंदरखाने से भी विरोध होगा इस बात की खबर ने कांग्रेस आलाकमान की नींद उड़ा दी है तभी तो सिंधिया के सीट बदलने की खबरें राजनीति बाजार को गरम कर रही हैं ।
वहीं ग्वालियर सीट को लेकर भी स्थिति साफ नहीं है क्योंकि कांग्रेस का स्थानीय धड़ा प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया को प्रत्याशी बनाये जाने की माँग कर चुका है और सिंधिया गुना छोड़ते हैं तो वे ग्वालियर से ही चुनाव लड़ेंगे लेकिन यहाँ से प्रदेश कांग्रेस के अन्य बड़े नेता पूर्व में प्रत्याशी रहे अशोक सिंह को प्रत्याशी बनाये जाने के पक्ष में है क्योंकि वे किसी भी हालात में सिंधिया को मजबूत होते नहीं देखना चाहेंगे ।
यही हालात भाजपा के हैं, भाजपा ग्वालियर और मुरैना को लेकर चिंता में है हालांकि अभी दोनों सीटों पर भाजपा का कब्जा है । ग्वालियर से नरेंद्र सिंह तोमर सांसद हैं और मोदी सरकार में कद्दावर मंत्री भी है लेकिन क्षेत्र में उनके प्रति नाराजगी बहुत है यही कारण है कि बार बार उनके क्षेत्र बदलने के कयास लगाए जाते रहे हैं, इससे पूर्व वे मुरैना से सांसद थे लेकिन यही हालत होने के कारण वे ग्वालियर आये,अब उनको लेकर विदिशा या भोपाल की चर्चा है और खबरों के मुताबिक यदि सिंधिया या उनकी पत्नी ग्वालियर से चुनावी मैदान में उतरते हैं तो तोमर कभी भी यहाँ चुनाव नहीं लड़ेंगे ,अब ऐसे में भाजपा किसे उम्मीदवार बनाएगी ये संशय बना हुआ है ।
मुरैना सीट से अनूप मिश्रा सांसद हैं, उनके प्रति भी क्षेत्र में जबरदस्त विरोध है उनकी गुमशुदगी के पोस्टर भी चश्पा किये गए थे ऐसे में वे भी अपनी सीट बदलना चाहते हैं, अब ग्वालियर के अलावा उनके लिए कोई विकल्प नहीं है । ग्वालियर की राह भी मिश्र के लिए आसान नहीं है क्योंकि मिश्रा ग्वालियर जिले की भितरवार विधानसभा सीट से लगातार दो बार चुनाव हार चुके हैं ।
अंचल की सीटों पर भाजपा और कांग्रेस दोनों को ही चेहरों को चुनने में पसीना आ रहा है ।

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