भगवान की प्राप्ति समर्पण भाव से मिलती है: सुधासागर जी महाराज



बूंदी-मुनिपुंगव सुधासागर जी  महाराज संघ  शुक्रवार सुबह शीलोदय तीर्थ क्षेत्र से विहार करते हुए मधुबन काॅलोनी के जैन मंदिर में पहुंचे, जहां उन्होेंने शांतिधारा कराई। इसके बाद बैंडबाजे व श्रद्धालुओं के जयकारे के साथ मुनि  ससंघ नैनवां रोड के श्रीशीतलनाथ दिगंबर जैन मंदिर पहुंचे। इस दौरान धर्मसभा में सुधासागर जी महाराज ने कहा कि धर्म प्रभावना बनाए रखने के लिए व्यक्ति को मन, वचन और कर्म से अपने पूरे परिवार को पूरे समर्पण भाव से आगे बढ़ाना चाहिए, तभी भगवान के चरणों में जगह मिलना संभव है।
उन्होंने कहा कि एक पापी अपने पाप कर्म के लिए सब कुछ दाव पर लगा देता है। तब ही वह पापी के रूप में जाना जाता है। उन्होंने रावण का उदाहरण देते हुए बताया कि अपने पापों को इतना बड़ा दिया था कि वे आज भी पाप कर्म के लिए जाना जाता  हैैं। मुनिश्री ने कहा कि व्यक्ति की यह सबसे बड़ी कमजोरी है कि वह पाप तो बिना पूछे करता है, जबकि वह धर्म अपनों से पूछकर करता है। भक्त प्रहलाद-हिरण्यकश्यप का उदाहरण देते हुए कहा कि पाप कर्म को दूर करने के लिए अपने पिता से दुश्मनी ले ली थी। मुनिश्री ने कहा कि एक पिता को अपने पुत्र से दिनभर का हिसाब जरूर पूछना चाहिए। जिससे बालक अधर्म के रास्ते पर आगे न बढ़ सके। मुनिश्री ने कहा कि शहर के श्रद्धालु शीलोदय तीर्थ क्षेत्र के रक्षक बनकर आगे आएं, क्योंकि यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर का होगा। श्रद्धालु दूर-दूर से आते रहेंगे। मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य जन्म 84 लाख योनियों के भुगतने के बाद अच्छे समाज में मिलता है, इसे धर्म प्रभावना में लगाएं।
   संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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