दिलों की धरती पर सुरभित होता है महावीर का धर्म - मुनि श्री समता सागर जी



अरथूना-अाज आपके शहर का मार्ग महावीर है, आपके पड़ोस का उद्यान महावीर है, आपके शहर का सरोवर महावीर है, आपके मित्र का स्कूल महावीर है, पर पथ का पथिक, मार्ग का राही, विद्यालय का छात्र महावीर से अनजान है, क्योंकि महावीर का धर्म चौराहों शिलापटटों पर नहीं, दिलों की धरती पर सुरभित होता है महावीर सरोवर, उद्यानों का नहीं ह्रदय सरोवर का देवता है महावीर की अहिंसा को किसी स्थान विशेष में कैद ना करो, वह तो खुले आकाश की तरह हर दिल की आवाज है। महावीर की अहिंसा इस देश का धर्म ही नहीं, जीवन शैली भी है। यह विचार आचार्य श्री  विद्यासागर जी महाराज  के शिष्य मुनि श्री समता सागरजी  महाराज ने चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर अरथूना में संत शिरोमणि प्रवचन माला में व्यक्त किए।
आज सारा विश्व हिंसा की आग मे जल रहा
मुनि श्री  ने गहरी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि आज सारा विश्व हिंसा की आग में जल रहा है, स्वार्थ का पेट्रोल हिंसा के दावानल को और अधिक भड़का रहा है। नफरत की दीवारें अवरोध बनकर अहिंसा के शीतल की उपेक्षा कर रही है। कुल मिलाकर विश्व का मानव असुरक्षित और भयाक्रांत है, हालात के इन भीषणतम अंधेरों में रोशनी की एक किरण हो सकती है भगवान महावीर की अहिंसा, जिसके आधार पर जियो और जीने दो का अमृत तत्व हाथ लगता है। अहिंसा का मार्ग ही हमें शांति दिला सकता है।
      संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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