जय - जय प्रदेश के मामा।
प्रेमसिंह पुत्र शिवराज नामा।।
प्रेमसिंह पुत्र शिवराज नामा।।
सीहोर के जैत की पावन भू पर।
धन्य किया तुमने जन्म लेकर।।
धन्य किया तुमने जन्म लेकर।।
मध्यप्रदेश के तुम ही राजा।
जन हितैषी सब तुमरे काजा।।
जन हितैषी सब तुमरे काजा।।
अति विकास प्रदेश का कीन्हा।
प्रदेशहिं सिरमौर बना दीन्हा।।
प्रदेशहिं सिरमौर बना दीन्हा।।
भ्रष्ट, अपराधी थर - थर काँपे।
गरीब को न कोई चिंता व्यापै।।
गरीब को न कोई चिंता व्यापै।।
मिटे न गरीब और मिटी गरीबताई।
सस्ती बिजली से खुश किसान भाई।।
सस्ती बिजली से खुश किसान भाई।।
जन-जन के तुम हो दुलारे।
बेटियों के तुम हो रखवारे।।
बेटियों के तुम हो रखवारे।।
महिला उत्पीड़न तुमने मिटाया।
बेटियों का कन्यादान कराया।।
बेटियों का कन्यादान कराया।।
जब-जब शिवराज नाम सुनावै।
गर्व से हमारा सिर उठि जावै।।
गर्व से हमारा सिर उठि जावै।।
समाज ने अभिमान किया है।
तुमने ही तो ऊँचा नाम किया है।।
तुमने ही तो ऊँचा नाम किया है।।
खेती को लाभ का धंधा बनाया।
प्रदेश का गौरव तुमने ही बढाया।।
प्रदेश का गौरव तुमने ही बढाया।।
सबके दिल को जीत लिया।
सबसे ही आशीर्वाद लिया।।
सबसे ही आशीर्वाद लिया।।
नक्षत्र गगन में चमक रहे हैं।
उत्सव के दीप जल रहे हैं।।
उत्सव के दीप जल रहे हैं।।
राजनीति में तुमने कमाल किए हैं।
नव गीत स्रजन भी सिखा दिए हैं।।
नव गीत स्रजन भी सिखा दिए हैं।।
जन नायक का वंदन-वंदन है।
हमारे मामाजी का अभिनंदन है।।
हमारे मामाजी का अभिनंदन है।।
।।इंजी. वीरबल सिंह "वीर" ।।

