राजनीतिक हलचल-लोकसभा चुनाव में दिग्गज नेताओं के परिवार के सदस्यों के चुनाव लड़ने की चर्चाओं के साथ ही वंशवाद पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया का ग्वालियर और नकुलनाथ का नाम छिंदवाड़ा से लगभग तय होने के बाद बीजेपी ने कांग्रेस वंशवाद की हदें तोड़ने का आरोप लगाया है तो वहीं कांग्रेस ने भी बाबूलाल गौर, कैलाश विजयवर्गीय और शिवराज सिंह चौहान पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया है।
प्रियदर्शनी राजे सिंधिया, नकुलनाथ और साधना सिंह ये वो तीन नाम है जिनके लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार के रूप में उतरने की पूरी संभावना है। प्रियदर्शनी राजे, ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी है तो नकुलनाथ कमलनाथ के पुत्र हैं वहीं साधना सिंह पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी हैं। जाहिर है इन नामों पर चर्चा के साथ ही परिवारवाद को लेकर भी सियासत गर्म हो गई है। कांग्रेस ने बीजेपी को कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया है कि वंशवाद बीजेपी की देन है। कैलाश विजयवर्गीय हो या फिर बाबुलाल गौर सभी ने इसको बढ़ावा दिया है और अब शिवराज सिंह भी इसी रास्ते पर हैं।
दूसरी तरफ वंशवाद के मुद्दे पर लंबे समय से कांग्रेस को घेरते आई बीजेपी को एक बार फिर वंशवाद के मुद्दे पर घरेने का मौका मिल गया है। बीजेपी ने खुद को केडरबेस पार्टी बताया है और कांग्रेस पर वंशवाद ओर परिवारवाद की हद लांघने का आरोप लगाया है। विरासत की सियासत को लेकर राजनीति में ये झगड़ा नया नहीं है। इस लोकसभा चुनाव में भी ये मुद्दा जमकर गूंजने वाला है। अब देखना दिचस्प होगा की किसका परिवारवाद मतदाताओं का भाता और किसका नकारा जाता है।
प्रियदर्शनी राजे सिंधिया, नकुलनाथ और साधना सिंह ये वो तीन नाम है जिनके लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार के रूप में उतरने की पूरी संभावना है। प्रियदर्शनी राजे, ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्नी है तो नकुलनाथ कमलनाथ के पुत्र हैं वहीं साधना सिंह पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी हैं। जाहिर है इन नामों पर चर्चा के साथ ही परिवारवाद को लेकर भी सियासत गर्म हो गई है। कांग्रेस ने बीजेपी को कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया है कि वंशवाद बीजेपी की देन है। कैलाश विजयवर्गीय हो या फिर बाबुलाल गौर सभी ने इसको बढ़ावा दिया है और अब शिवराज सिंह भी इसी रास्ते पर हैं।
दूसरी तरफ वंशवाद के मुद्दे पर लंबे समय से कांग्रेस को घेरते आई बीजेपी को एक बार फिर वंशवाद के मुद्दे पर घरेने का मौका मिल गया है। बीजेपी ने खुद को केडरबेस पार्टी बताया है और कांग्रेस पर वंशवाद ओर परिवारवाद की हद लांघने का आरोप लगाया है। विरासत की सियासत को लेकर राजनीति में ये झगड़ा नया नहीं है। इस लोकसभा चुनाव में भी ये मुद्दा जमकर गूंजने वाला है। अब देखना दिचस्प होगा की किसका परिवारवाद मतदाताओं का भाता और किसका नकारा जाता है।
