राजनीतिक हलचल-लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता लागू हो गई है और साथ ही सभी दलों ने अपने अपने प्रत्याशी चयन प्रक्रिया को और तेज कर दिया है । खबर है कि कांग्रेस की पहली सूची एक या दो दिन में आ सकती है, खबरों के मुताबिक पहली सूची में 12 सीटों पर प्रत्याशी का चयन हो चुका है । इन 12 उम्मीदवार की लिस्ट में गुना से सिंधिया परिवार के मुखिया महाराज यानी ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम तय हुआ है । गुना सीट किसी एक दल की परंपरागत सीट नहीं बल्कि सिंधिया परिवार की परंपरागत सीट रही है, पिछली तीन पीढ़ी इस सीट से प्रतिनिधि निर्वाचित होते रहे हैं यही कारण है कि कांग्रेस की ओर से यहाँ से कोई और दावेदार भी सामने नहीं आता है ।
इस बार ग्वालियर से महारानी यानी कि प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया का नाम लगभग तय माना जा रहा है, पहले उनके नाम को लेकर गुना से कयास लगाए जा रहे थे लेकिन महारानी को लेकर ग्वालियर से माँग उठ रही थी और अब कयासों पर विराम लगता दिख रहा है और महारानी का नाम लगभग तय है । आपको बताते चलें कि ग्वालियर सीट पर कांग्रेस को लंबे समय से सफलता प्राप्त नहीं हुई है । यहाँ से दो बार के पूर्व प्रत्याशी रहे अशोक सिंह का नाम एक बार फ़िर प्रबल दावेदार के तौर पर सामने आ रहा था और इनके अलावा युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव तथा लोकसभा अध्यक्ष संजय सिंह यादव ( किरार ) का नाम भी चर्चा में है ,संजय सिंह कमलनाथ सरकार के कैबिनेट मंत्री लाखन सिंह यादव के भतीजे हैं, संजय के अलावा ग्वालियर ग्रामीण अध्यक्ष मोहन सिंह राठौर का भी नाम दावेदारों में शामिल हैं लेकिन कांग्रेस इस बार किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहती है यही कारण है कि महारानी का नाम ग्वालियर लोकसभा सीट से कांग्रेस फाइनल कर सकती है । क्योंकि संजय सिंह ,अशोक सिंह और मोहन सिंह में से किसी एक नाम पर सबकी सहमति बन पाना मुश्किल हो सकता है और और ऐसे में भितरघात की संभावना बढ़ जाएगी जिसका फायदा भाजपा को सीधे तौर पर मिलेगा । महाराज को गुना और महारानी को ग्वालियर से प्रत्याशी घोषित करने पर कांग्रेस न केवल इन दो सीटों पर विजय श्री की राह पर होगी बल्कि अंचल की दो सीटों मुरैना-श्योपुर और भिंड-दतिया पर भी फायर ब्रांड नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का प्रभाव पड़ेगा जिसका फायदा कांग्रेस को सीधे तौर पर मिलेगा ।
इस बार ग्वालियर से महारानी यानी कि प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया का नाम लगभग तय माना जा रहा है, पहले उनके नाम को लेकर गुना से कयास लगाए जा रहे थे लेकिन महारानी को लेकर ग्वालियर से माँग उठ रही थी और अब कयासों पर विराम लगता दिख रहा है और महारानी का नाम लगभग तय है । आपको बताते चलें कि ग्वालियर सीट पर कांग्रेस को लंबे समय से सफलता प्राप्त नहीं हुई है । यहाँ से दो बार के पूर्व प्रत्याशी रहे अशोक सिंह का नाम एक बार फ़िर प्रबल दावेदार के तौर पर सामने आ रहा था और इनके अलावा युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव तथा लोकसभा अध्यक्ष संजय सिंह यादव ( किरार ) का नाम भी चर्चा में है ,संजय सिंह कमलनाथ सरकार के कैबिनेट मंत्री लाखन सिंह यादव के भतीजे हैं, संजय के अलावा ग्वालियर ग्रामीण अध्यक्ष मोहन सिंह राठौर का भी नाम दावेदारों में शामिल हैं लेकिन कांग्रेस इस बार किसी भी तरह का जोखिम नहीं उठाना चाहती है यही कारण है कि महारानी का नाम ग्वालियर लोकसभा सीट से कांग्रेस फाइनल कर सकती है । क्योंकि संजय सिंह ,अशोक सिंह और मोहन सिंह में से किसी एक नाम पर सबकी सहमति बन पाना मुश्किल हो सकता है और और ऐसे में भितरघात की संभावना बढ़ जाएगी जिसका फायदा भाजपा को सीधे तौर पर मिलेगा । महाराज को गुना और महारानी को ग्वालियर से प्रत्याशी घोषित करने पर कांग्रेस न केवल इन दो सीटों पर विजय श्री की राह पर होगी बल्कि अंचल की दो सीटों मुरैना-श्योपुर और भिंड-दतिया पर भी फायर ब्रांड नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का प्रभाव पड़ेगा जिसका फायदा कांग्रेस को सीधे तौर पर मिलेगा ।
