गुना में बसपा से किसे नफा किसे नुकसान



शिबपुरी- मध्यप्रदेश की सरकार बनाने में सपा और बसपा ने भले ही कांग्रेस को समर्थन दे दिया हो लेकिन  2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से दोनों ही दलों परहेज कर रहे हैं । ग्वालियर- चम्बल अंचल में अपना प्रभाव रखने वाली बसपा ने मुरैना-श्योपुर संसदीय क्षेत्र से रामलखन सिंह को प्रत्याशी बनाया है तो वहीं अंचल ही नहीं बल्कि प्रदेश की हाई प्रोफाइल सीट मानी जानी वाली गुना -शिवपुरी संसदीय सीट से धाकड़ लोकेंद्र सिंह राजपूत को प्रत्याशी बनाया है । बसपा ने यहाँ अपना प्रत्याशी घोषित कर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है ।
लोकेंद्र सिंह के आने से भाजपा और कांग्रेस दोनों को ही नुकसान होता दिखाई दे रहा है क्योंकि बसपा प्रत्याशी मैदान में न होने के कारण बसपा का अधिकतम वोट कांग्रेस को मिलता है ऐसे में स्पष्ट है कि कांग्रेस के वोट का ध्रुवीकरण होगा और सीधे तौर पर देखा जाए तो कांग्रेस प्रत्याशी को इसका नुकसान होगा । गुना सीट पर करीब दो से ढाई लाख वोट बैंक धाकड़ समुदाय का है जो अब तक शिवराज सिंह के नाम पर भाजपा को मिलता रहा है चूँकि शिवराज सिंह अब सत्ता से बाहर हैं और इस वोट के भाजपा को मिलने से सीधे तौर पर शिवराज सिंह को कोई फायदा नहीं होगा ऐसे में धाकड़ जाति का वोट बसपा को मिल सकता है ,इतना ही नहीं इस बार पिछड़े वर्ग के प्रत्याशी की माँग भी उठ रही थी तभी तो सिंधिया के खिलाफ भाजपा की ओर से जातिगत आधार पर कभी शिवराज सिंह ,डॉ सलोनी सिंह तो कभी पूर्व बीज निगम अध्यक्ष का नाम चर्चा में रहा है । बसपा ने इन सब से पहले प्रत्याशी घोषित कर उनकी रणनीति पर पानी फेर दिया है और भाजपा को नए सिरे सोचने पर मजबूर कर दिया है और राजनीतिक गलियारों से खबर है कि अब सिंधिया भी सेफ जोन में जाने की सोच रहे हैं और उनको लेकर ग्वालियर से चुनाव लड़ने के कयास लगाए जा रहे हैं । भाजपा को अभी इस सीट से प्रत्याशी की तलाश है, बसपा से लोकेंद्र सिंह के आने से फिलहाल तो भाजपा और कांग्रेस दोनों को ही नुकसान होता दिखाई दे रहा है ।

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