महावीरजी-दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र श्रीमहावीरजी के 6 दिवसीय वार्षिक मेले का मुख्य आकर्षक भगवान जिनेन्द्र की रथयात्रा शनिवार को पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई।
रथयात्रा में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भगवान महावीर के जयकारों से अहिंसा नगरी महावीरमय हो गई। रथयात्रा में जैन धर्मालंबियों के साथ गुर्जर-मीना समेत सभी समुदायों के लोग शामिल हुए और रथ में विराजी भगवान की प्रतिमा के दर्शन किए। अहिंसा के प्रवर्तक भगवान महावीर की यह यात्रा सामाजिक सदभाव की मिसाल भी बनी। मुख्य मंदिर में भगवान महावीर की प्रतिमा का अभिषेक करने के बाद केसरिया वस्त्र पहने रजत मुकूट लगाएं इंद्रो का रूप धारण किए हुए श्रद्धालुओं ने प्रतिमा को स्वर्णिम आभा से सुसज्जित कर विशाल रथ में विराजमान किया। इससे पूर्व प्रबंध कार्यकारिणी कमेटी ने मूलनायक भगवान महावीर स्वामी जी की मूर्ति को निकालने वाले चर्मकार वंशज के प्रतिनिधि का सम्मान किया।
बैंड बाजे के पीछे 21 केसरिया ध्वज रथ यात्रा को विशिष्ट स्वरूप प्रदान कर रहे थे उसके पीछे धर्म चक्र और फिर जैन मूल संघ आमनाथ भट्ठारक जी की पालकी उठाए श्रद्धालु चल रहे थे। पालकी के पीछे विशाल एरावत हाथी ग्रामीणों का मन मोह रहा था।
भगवान महावीर का रथ जैसे ही मुख्य मंदिर द्वार से बाहर निकला शोभायात्रा में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। अंत में मुख्य मंदिर में भगवान महावीर स्वामी जी की मूलनायक प्रतिमा को विराजमान करने के बाद विशाल रथ यात्रा का समापन हुआ। इस अवसर पर क्षेत्र कमेटी की ओर से देश विदेश में विशिष्ट कार्य हेतु डॉक्टर प्रेमचंद डांडिया, रवि रतन कासलीवाल को तथा पुस्तक लेखन शोध कार्यों के लिए डॉक्टर आनंद कुमार को महावीर पुरस्कार का प्रशस्ति पत्र एवं ₹51000 नगद प्रदान किए। इसी प्रकार डॉ धर्मेंद्र जैन को स्वयंभू पुरस्कार प्रशस्ति पत्र एवं ₹31000 देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मंदिर कमेटी के अध्यक्ष मंत्री, उपाध्यक्ष , संयुक्त मंत्री , कोषाध्यक्ष , सहित जिले के आला अधिकारी सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
संकलित अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
रथयात्रा में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। भगवान महावीर के जयकारों से अहिंसा नगरी महावीरमय हो गई। रथयात्रा में जैन धर्मालंबियों के साथ गुर्जर-मीना समेत सभी समुदायों के लोग शामिल हुए और रथ में विराजी भगवान की प्रतिमा के दर्शन किए। अहिंसा के प्रवर्तक भगवान महावीर की यह यात्रा सामाजिक सदभाव की मिसाल भी बनी। मुख्य मंदिर में भगवान महावीर की प्रतिमा का अभिषेक करने के बाद केसरिया वस्त्र पहने रजत मुकूट लगाएं इंद्रो का रूप धारण किए हुए श्रद्धालुओं ने प्रतिमा को स्वर्णिम आभा से सुसज्जित कर विशाल रथ में विराजमान किया। इससे पूर्व प्रबंध कार्यकारिणी कमेटी ने मूलनायक भगवान महावीर स्वामी जी की मूर्ति को निकालने वाले चर्मकार वंशज के प्रतिनिधि का सम्मान किया।
बैंड बाजे के पीछे 21 केसरिया ध्वज रथ यात्रा को विशिष्ट स्वरूप प्रदान कर रहे थे उसके पीछे धर्म चक्र और फिर जैन मूल संघ आमनाथ भट्ठारक जी की पालकी उठाए श्रद्धालु चल रहे थे। पालकी के पीछे विशाल एरावत हाथी ग्रामीणों का मन मोह रहा था।
भगवान महावीर का रथ जैसे ही मुख्य मंदिर द्वार से बाहर निकला शोभायात्रा में श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। अंत में मुख्य मंदिर में भगवान महावीर स्वामी जी की मूलनायक प्रतिमा को विराजमान करने के बाद विशाल रथ यात्रा का समापन हुआ। इस अवसर पर क्षेत्र कमेटी की ओर से देश विदेश में विशिष्ट कार्य हेतु डॉक्टर प्रेमचंद डांडिया, रवि रतन कासलीवाल को तथा पुस्तक लेखन शोध कार्यों के लिए डॉक्टर आनंद कुमार को महावीर पुरस्कार का प्रशस्ति पत्र एवं ₹51000 नगद प्रदान किए। इसी प्रकार डॉ धर्मेंद्र जैन को स्वयंभू पुरस्कार प्रशस्ति पत्र एवं ₹31000 देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मंदिर कमेटी के अध्यक्ष मंत्री, उपाध्यक्ष , संयुक्त मंत्री , कोषाध्यक्ष , सहित जिले के आला अधिकारी सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।
संकलित अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
