राजनीतिक हलचल-लोकसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू होते ही सभी राजनैतिक दलों ने अपने अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी शुरू कर दी है । सिटिंग सांसद अपनी सुरक्षित सीट की तलाश में हैं तो दावेदार अपने आकाओं से लेकर पार्टी दफ्तर की परिक्रमा कर रहे हैं । प्रभाररियों की हर रोज भोपाल से लेकर दिल्ली की मैराथन हो रही है ।
मध्यप्रदेश में भाजपा के कद्दावर नेता माने जाने वाले केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर वर्तमान में ग्वालियर से सांसद हैं और बताया जाता है कि उन्होंने विकास कार्य भी बहुत किये हैं लेकिन पिछली बार कम अंतर से जीत दर्ज करने वाले तोमर को इस बार सुरक्षित सीट की तलाश थी ,तभी तो शुरुआत से ही राजनीतिक गलियारों में उनके सीट बदलने के कयास लगाये जा रहे थे ।
पार्टी द्वारा नरेंद्र सिंह को ग्वालियर से प्रत्याशी न बनाते हुए मुरैना-श्योपुर लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाते ही उनके विरोध में मुरैना सांसद अनूप मिश्रा से लेकर अन्य दावेदार और कार्यकर्ताओं ने आवाज मुखर कर दी ।
मध्यप्रदेश में भाजपा के कद्दावर नेता माने जाने वाले केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर वर्तमान में ग्वालियर से सांसद हैं और बताया जाता है कि उन्होंने विकास कार्य भी बहुत किये हैं लेकिन पिछली बार कम अंतर से जीत दर्ज करने वाले तोमर को इस बार सुरक्षित सीट की तलाश थी ,तभी तो शुरुआत से ही राजनीतिक गलियारों में उनके सीट बदलने के कयास लगाये जा रहे थे ।
पार्टी द्वारा नरेंद्र सिंह को ग्वालियर से प्रत्याशी न बनाते हुए मुरैना-श्योपुर लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाते ही उनके विरोध में मुरैना सांसद अनूप मिश्रा से लेकर अन्य दावेदार और कार्यकर्ताओं ने आवाज मुखर कर दी ।
ग्वालियर से पहले तोमर मुरैना संसदीय क्षेत्र से ही सांसद थे लेकिन पांच साल में ही पूरे क्षेत्र में उनका इतना विरोध हुआ कि वे सुरक्षित सीट की तलाश में ग्वालियर आ गए थे, यहाँ से 2014 में उन्होंने मोदी लहर में जीत तो दर्ज की लेकिन कांग्रेस के अशोक सिंह से बहुत ही कम अंतर से । जो हालात पहले तोमर के लिए मुरैना में थे वही स्थिति ग्वालियर में बन गई, तोमर के मंत्री रहते हुए विधानसभा चुनाव में ग्वालियर सहित मुरैना में भाजपा की शून्य लग गई केवल ग्वालियर ग्रामीण से भारत सिंह कुशवाह की जीत से संतोष करना पड़ा ।
अंचल के सभी प्रत्याशियों ने अपनी हार का कारण पार्टी की भितरघात को बताया और इसका जिम्मेदार नरेंद्र सिंह को ठहराया । मतदाता के बीच तोमर के लिए नाराजगी और पार्टी के विधानसभा चुनाव में हारे हुए नेताओं के भितरघात के डर से एक बार फिर तोमर सुरक्षित सीट की तलाश में मुरैना पहुँच गए लेकिन यहाँ शुरुआत से विरोध झेलना पड़ रहा है ।
तोमर के मुरैना से प्रत्याशी बनते ही वर्तमान सांसद अनूप मिश्रा खुलकर विरोध पर उतर आए ,उनके कांग्रेस में जाने की भी खबरें थी लेकिन मिश्रा ने कांग्रेस में जाने से साफ इंकार कर दिया । इसके अलावा मुरैना महापौर अशोक अर्गल ,भिंड और मुरैना से प्रबल दावेदार थे लेकिन पार्टी ने भिंड में संध्या राय को प्रत्याशी घोषित कर दिया ऐसे में अर्गल काफी नाराज हुए ,खवर है कि अर्गल कांग्रेस के टिकिट पर भिंड से चुनाव लड़ सकते हैं ।
अंचल के सभी प्रत्याशियों ने अपनी हार का कारण पार्टी की भितरघात को बताया और इसका जिम्मेदार नरेंद्र सिंह को ठहराया । मतदाता के बीच तोमर के लिए नाराजगी और पार्टी के विधानसभा चुनाव में हारे हुए नेताओं के भितरघात के डर से एक बार फिर तोमर सुरक्षित सीट की तलाश में मुरैना पहुँच गए लेकिन यहाँ शुरुआत से विरोध झेलना पड़ रहा है ।
तोमर के मुरैना से प्रत्याशी बनते ही वर्तमान सांसद अनूप मिश्रा खुलकर विरोध पर उतर आए ,उनके कांग्रेस में जाने की भी खबरें थी लेकिन मिश्रा ने कांग्रेस में जाने से साफ इंकार कर दिया । इसके अलावा मुरैना महापौर अशोक अर्गल ,भिंड और मुरैना से प्रबल दावेदार थे लेकिन पार्टी ने भिंड में संध्या राय को प्रत्याशी घोषित कर दिया ऐसे में अर्गल काफी नाराज हुए ,खवर है कि अर्गल कांग्रेस के टिकिट पर भिंड से चुनाव लड़ सकते हैं ।
ग्वालियर के बाद मुरैना में होते विरोध को भांपते हुए पार्टी और खुद तोमर एक बार फिर सीट बदलना चाहते हैं, अब तोमर को लेकर भोपाल संसदीय क्षेत्र से कयास लगाए जा रहे है लेकिन यहाँ भी उनकी राह आसान नहीं है क्योंकि यहाँ से कांग्रेस के कद्दावर नेता और सूबे की राजनीति के पूर्व मुखिया दिग्विजयसिंह प्रत्याशी हैं ऐसे में इस चुनावी रन में दो ठाकुरों को लड़ाकर किसी एक की राजनैतिक हत्या होना तय है ।
तोमर बडे नेता होने के कारण मन चाही सीट से अपना टिकिट तो फाइनल करा लेंगे लेकिन जीत की गारंटी किसी भी सीट से मुश्किल लग रही है अभी भी उनकी सीट को लेकर पार्टी में मंथन चल रहा है ।
