चंदेरी-मुनि श्री सुव्रत सागर जी महाराज ने कहा जिन तीर्थकर प्रभु का जन्म होता है उसके पीछे षोडशकारण भावनाओं का महत्व होता है। इन्ही भावनाओं के कारण आत्मा भगवान बन जाती है, बहुत सारे अतिशय होते है। उनमें प्रमुख जन्म के 10 अतिशय होते है। मुनि श्री ने कहा इन अतिशय को जानकर ऐसा लगता है भक्ति के प्रभाव से कितना बड़ा वैभव प्राप्त हो सकता है। ऐसे वैभव को प्राप्त करने के पीछे संस्कारों का हाथ होता है, लेकिन आज हम सब कुछ तो चाहते है परन्तु संस्कारो से पीछे रहना चाहते हैं। अगर संस्कार ही नही होगे तो शिक्षा परिवार का क्या महत्व होगा। इसलिए शिक्षा के पहले संस्कार, व्यापार के पहले व्यवहार ओर परमात्मा के पहले जिसने भी संभाल लिये है ।वह वास्तव इस युग का सफल इंसान होगा। इसलिये संस्कारो पर नज़र रखनी होगी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमण्डी
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमण्डी
