नाबालिक के साथ छेड़छाड़ करने वाले आरोपी को तीन-तीन वर्ष का सश्रम कारावास व 1000 -1000 रूपये का अर्थदंड




जबलपुर-न्यायालय श्रीमती ज्योति मिश्रा विशेष न्यायाधीश (पाक्सोे) जबलपुर के न्यायालय द्वारा, आरोपी धर्मेन्द्र बरकड़े को, थाना बरेला के अपराध क्रमांक 191/18 धारा 354,323 भादवि 7, 8 पाक्सो एक्ट  में 03-03 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1000-1000 रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। 
           दिनांक 21.05.2018 के सुबह 8ः00 बजे पीड़िता अपनी बुआ की लड़की के साथ बरेला जा रही थी, तभी गांव के पुलियाॅ के आगे आरोपी धर्मेन्द्र बरकड़े अचानक उसके सामने आकर उसे रोककर उसका दाहिना हाॅंथ पकड़कर बुरी नीयत से उसकी कमर पकड़कर अपने तरफ खीचंने लगा तो पीड़िता घबराकर रोने लगी और आरोपी से अपने आपको छुड़ाने लगी तो आरोपी ने उसका गला पकड़कर उसके साथ मारपीट करने लगा जिससे उसे बांये गाल में चोट आई, उसकी बुआ कि लड़की ने आरोपी को रोकने का प्रयास किया किन्तु वह नहीं माना उसी समय पुरुषोत्तम सैयाम आ गया जिसे देखकर आरोपी ने उसे छोड़ दिया और पुरुषोत्तम सैयाम द्वारा डाटने पर आरोपी वहां से चले गया पीड़िता ने उक्त घटना के संबंध में माॅं,मामा व बड़े पिता को जानकारी दी, जिस पर से थाना बरेला के अपराध क्रमांक 191/18 अंतर्गत् धारा  354,354ए,341,323,294 भादवि एवं धारा 7, 8 पाक्सो एक्ट के अन्तर्गत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। विवेचना उपरान्त अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। प्रभारी उप संचालक अभियोजन/जिला लोक अभियोजन अधिकारी श्री शेख वसीम के निर्देशन में मामले में अभियोजन की ओर से अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी अजय कुमार जैन की अनुपस्थिति में द्वितीय प्रभारी अधिकारी श्रीमती बबीता कुल्हारा के द्वारा मामलें में सशक्त पैरवी करते हुए 06 साक्षियों को न्यायालय में परीक्षित करवाया गया।
        श्री अजय कुमार जैन विशेष लोक अभियोजक /अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी जबलपुर के तर्को से सहमत होते हुए न्यायालय विशेष न्यायाधीश (पाक्सोे) जबलपुर के न्यायालय द्वारा, आरोपी धर्मेन्द्र बरकड़े को थाना  बरेला के अपराध क्रमांक 191/18 अंतर्गत् धारा  354 भादवि में 03 वर्ष एवं 1000 रूपये का अर्थदंड,धारा 323 भादावि में 03 माह का सश्रम कारावास एवं 100 रूपये  एवं धारा 7,8 पाक्सो एक्ट में 01वर्ष का सश्रम कारावास एवं कुल 1000 रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया। अर्थदण्ड की 1000रूपये की  राशि प्रतिकर स्वरूप उसके वैध संरक्षक के माध्यम से प्रदान करने का आदेश किया गया।     


               

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