बांसवाड़ा-बाहुबली कॉलोनी जैन मंदिर में विराजित आर्यिका रत्न 105 अर्हम श्री माताजी ने अपने प्रवचन में बताया कि प्रिय आत्म प्रसंग चल रहा था जहां पर आचार्य कुंदकुंद स्वामी आत्मा की अंदर की दृष्टि को बताते हैं। वहीं पर कुंदकुंद स्वामी सम्यक दृष्टि मिथ्या दृष्टि के बारे में बताते हैं, जो व्यक्ति बुरे कार्य करता है वह मिथ्या दृष्टि जीव में आता है। जो व्यक्ति धर्म और सबके हित में सोचता है वह सम्यक दृष्टि में आता है। माताजी ने कहा कि आप कौन हो, जगत की दृष्टि में कितने भी अच्छे रहे हो कोई मतलब नहीं है, पर भगवान की दृष्टि में यदि आपका काल ज्ञान को वैराग्य ज्ञान में व्यतीत हो रहा है तो तुम सम्यक दृष्टि हो। मिथ्या दृष्टि का काल आकांक्षा आलस्य कलह दुर्भाव में व्यतीत होता है। प्रत्येक अच्छे कार्यों में उसे आलस्य आएगा जो सर्व कर्म बंधनों से रही थी जो सर्वव्यापी है। गुरु मां ने बताया कि सभी जीवों को 1 दिन में 24 घंटे मिलते हैं तो हम सभी जीवों अपने समय को शुभ कार्यों में शुभ भावों में व्यतीत करना चाहिए। क्योंकि हम जैसा बीज डालते हैं, खेत में वैसे ही फल हमें प्राप्त होता है। हमें हमेशा स्वयं और दूसरों का हित करने वाले कार्य करना चाहिए। हम सभी को यही भावना भाते रहो की सारे जीव सुखी रहे व सारे जीव हमारे जैसे ही हैं। जिस प्रकार से हमें कष्ट होता है उसी प्रकार से बाकी सारे जीवों को कष्ट होता है, इसलिए हम सभी यही प्रयत्न करें अपने जीवन में मन में वचन से काय से किसी भी जीव को कष्ट न पहुंचाएं। यह जानकारी चातुर्मास कमेटी के प्रवक्ता महेंद्र कवालिया ने दी।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी
