शाहगढ़ -मानव जब तक क्रोध मान माया लोभ का त्याग नहीं करता तब तक वह सत्य नहीं बोल सकता, व्यक्ति हास्य के कारण भी असत्य बोलता है। यह बात पर्युषण पर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म पर मंगलवार को आचार्यश्री उदार सागर महाराज ने कही। उन्होंने कहा कि शास्त्र सम्मत वचन नहीं बोलना भी असत्य है, सत्य वही है जो सभी के लिए प्रिय हो, हितकारी हो। दृष्टांत के माध्यम से महाराज ने बताया कि किसी नगर में एक राजा रहता था जो एक आंख वाला था। राजा ने एक महल बनवाया उसमें चित्र लगवाने के लिए तीन चित्रकारों को राजा ने हूबहू स्वयं का चित्र बनाए जाने की जिम्मेदारी सौंपी। एक चित्रकार ने राजा से बिल्कुल जैसा हूबहू चित्र बनाया, दूसरे चित्रकार ने राजा की दोनों आंखें बनाकर चित्र में दर्शाई, तीसरे चित्रकार के बनाये चित्र में राजा को तीर से निशाना साधते हुए दिखाया जिसमें कमान पर चढ़ा तीर राजा की उस आंख तक आ गया जो आंख थी ही नहीं, लेकिन उस चित्र में राजा एक आंख वाला दिखाई नहीं देने से राजा को वह चित्र पसंद आया राजा ने तीसरे चित्रकार को पुरस्कृत किया। राजा ने बताया कि पहला चित्र सत्य था लेकिन प्रिय नहीं, दूसरा चित्र प्रिय है लेकिन सत्य नहीं है, तीसरा चित्र सत्य और प्रिय भी था। इसी प्रकार हमें भी प्रिय और हितकारी बचन बोलना चाहिए, आचार्य श्री ने दोहा के वर्णन किया बोले कि “ मधुर वचन है औषधि, कटु वचन है तीर। श्रवण द्वार तें संचरें साले सकल शरीर”।। अर्थात मधुर वचन औषधि के समान काम करते हैं, और कटु वचन तीर का काम करते हैं, हम सभी को सत्य एवं प्रिय हितकारी वचन बोलना चाहिए यही सनातन धर्म है।
भगवान पुष्पदंत का मोक्ष कल्याणक मनाया
तीर्थराज समेद शिखर पर्वत की सुप्रव कूट से 9वे तीर्थंकर भगवान पुष्पदंत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मोक्ष हुआ था। उनके निर्वाण महोत्सव पर मंगलवार को पंचायती जिनालय में संगीतमय सामुहिक पूजन अभिषेक शांतिधारा निर्वाण कांड उपरांत लाडू चढ़ाया गया। रात्रि में भव्य महाआरती उत्सव के रूप में हुई तद्पश्चात बड़ा मन्दिर परिसर में विराजमान उदारसागर महाराज द्वारा आचार्य भक्ति के उपरांत पूछे गए प्रश्नों के उत्तर देंने वालों को कमेटी की ओर से पुरस्कार वितरित किए गए।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी
