दिल्ली-आजकल भारतीय राजनीति में मुख्यमंत्री बदलने का चलन जोरों पर है, भारतीय जनता पार्टी ने बीते 5 महीने में आधा दर्जन मुख्यमंत्री बदल दिए, इस अनुभव को प्राप्त करने या आंतरिक कलह के चलते बीते दिन कांग्रेस ने भी पंजाब में अपना मुख्यमंत्री बदल दिया हालांकि अगले ही अपना नया मुख्यमंत्री भी बना दिया । भाजपा में कांग्रेस में मुख्यमंत्री बदलने में थोड़ा अंतर दिखाई देता है कि भाजपा में मुख्यमंत्री के साथ मंत्रिमंडल भी बदल दिया जाता है लेकिन आवाज तक नहीं आती और कांग्रेस के मुख्यमंत्री बदलने पर लड़ाई सड़कों पर आ जाती है । कांग्रेस ने पंजाब में चुनाव के ठीक पहले मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को उनकी राजनीतिक पिच पर बोल्ड कर दिया, इसके बाद नए मुख्यमंत्री की दौड़ में कई बड़े नेता शामिल थे और इन सबके बीच पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू का नाम प्रबल दावेदार के रूप में माना जा रहा था लेकिन कैप्टन अमरिंदर सिंह ने नवजोत सिंह को लेकर वगावत के सुर आलाकमान को सुना दिए, कैप्टन अमरिंदर सिंह यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा कि नवजोत सिंह के संबंध पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान और सेना प्रमुख जनरल बाजवा से है ऐसे में उनको मुख्यमंत्री बनाना राष्ट्रहित और प्रदेश हित में नहीं है, उन्होंने बगावती तेवर में कहा कि आलाकमान जिसे चाहे मुख्यमंत्री बनाए लेकिन सिद्धू को मुख्यमंत्री बनाया तो मैं विरोध करूँगा । आपको बता दें कि कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह के बीच लंबे समय से टकराव चल रहा है, सिद्धू लगातार दल बदल करते रहें और और एक बार फिर कांग्रेस में है । 24 घंटे राजनीतिक गलियारों में कयासों के बीच घूमती एक लंबी फेरिहस्त में कांग्रेस ने चौकाने वाले नाम चरणजीत सिंह चन्नी को पंजाब का नया मुख्यमंत्री चुन दिया है , चन्नी कैप्टन सरकार में मंत्री थे और दलित समाज से आते हैं ।
कैप्टन अमरिंदर सिंह को लेकर भी चर्चा है कि वे कांग्रेस में ही रहेंगे या फिर अलग राजनीतिक दल बनाएंगे हालांकि उनके आम आदमी पार्टी में भी शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं साथ ही अकाली दल के साथ भी जा सकते हैं, कैप्टन के बगावती तेवर को देखते हुए लगता है कि कांग्रेस में घुटन महसूस कर रहे हैं, कैप्टन ने चन्नी को मुख्यमंत्री बनाए जाने पर उम्मीद की है कि चन्नी प्रदेश हित में कार्य करेंगे । संगठनात्मक कमजोरी के चलते कैप्टन कांग्रेस के हाथ से छूट सकते हैं, कांग्रेस रूठों को कम ही मना पाती है और यही कारण है कि मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के रूठने के बाद राजस्थान में सचिन पायलेट तो छत्तीसगढ़ में टीएस सिंह देव भी कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है । पंजाब में नवागत मुख्यमंत्री पहले भी विवादों में रहे हैं और भाजपा इसे लेकर कांग्रेस को ट्रोल भी कर रही है, मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी मीटू को लेकर चर्चा में आए थे और एक महिला आईएएस अधिकारी ने चन्नी के चलते पंजाब से ट्रांसफर लिया था तब भी विवादों रहे, कुल मिलाकर कैप्टन नाराज रहे या बगावत की और सिद्दू अपनी अकड़ पर बने रहे और नवागत मुख्यमंत्री कुछ अच्छा नहीं कर पाए तो कांग्रेस के हाथ से दिखेगा "उड़ता पंजाब" ।
