कल से श्राद्ध पक्ष होंगे आरंभ,श्राद्ध के दौरन रखें इन बातों का खास ख्याल

पोहरी-पौराणिक ग्रंथों में वर्णित किया गया है कि देवपूजा से पहले जातक को अपने पूर्वजों की पूजा करनी चाहिए। पितरों के प्रसन्न होने पर देवता भी प्रसन्न होते हैं। यही कारण है कि भारतीय संस्कृति में जीवित रहते हुए घर के बड़े बुजुर्गों का सम्मान और मृत्योपरांत श्राद्ध कर्म किये जाते हैं।
श्राद्ध पितरों की संतुष्टि और प्रसन्नता के लिए की जाने वाली विशेष पूजा है। इस दौरान पितर श्रद्धा और समर्पण से प्रसन्न होकर आशिर्वाद देते हैं। जिससे घर में सुख शांती बनी रहती है। इस बार पितृ पक्ष 21 सितंबर से आरंभ हो रहा है जो 6 अक्टूबर तक रहेगा। माना जाता है कि इस दौरान आपके घर में पितर किसी भी रूप में आ सकते है। इसलिए कुछ बातों का खास ख्याल रखना बेहद जरूरी है।

जानकारों के अनुसार इन 16 दिनों में पूरी तरह ब्रह्मचर्य को अपनाना चाहिए। श्राद्धकर्ता को रोज स्नान के बाद तर्पण करना चाहिए। साथ ही उबटन, तेल जैसी चीजों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इन दिनों कौन कौन सी सावधानियां जरूरी हैं, आइए जानते हैं…

दोपहर में करें पूजा-पुराणों के अनुसार सुबह का समय देव पूजन के लिए होता है, जबकि दोपहर का समय पितृ काल कहलाता है। इसलिए पितरों की पूजा दोपहर को ही करनी चाहिए। साथ ही ब्राह्मण भोजन भी दोपहर को रखना चाहिए। इसके अलावा पितृगणों के लिए दान किया जाने वाला भोजन कौए, गाय या कुत्ते को जरूर देना चाहिए।
शुभ कार्य और खरीदारी न करें
शास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष में शुभ कार्य करना सही नहीं माना जाता है। क्योंकि यह वक्त पितृगणों को याद करने के लिए समर्पित है। इसलिए इस दौरान कोई भी ऐसा काम न करें, जो उन्हें याद करने की क्रिया में बाधा डाले। यही वजह है कि इन दिनों नई चीजों की खरीदी करना भी अच्छा नहीं माना जाता है।
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