100 वर्षों के भोग-विलास पूर्ण जीवन से एक दिन का त्याग का जीवन श्रेष्ठ है: अभय सागर जी



खुरई -प्राचीन जैन मंदिर में मुनिश्री अभय सागरजी  महाराज ने प्रवचन देते हुए  कहा कि संतान को अपार संपत्ति नहीं उत्तम संस्कार देना चाहिए। संस्कारहीन  रावण, कंस, दुर्योधन ने राज्य, परिवार सहित स्वयं का नाश करवाया तथा उत्तम  संस्कार युक्त ध्रुव, भक्त प्रहलाद ने संसार में सर्वोत्तम पद पाया। उत्तम  संस्कारी संसार में सर्वश्रेष्ठ और संपूर्ण संपत्ति है जो सत्य है।  उन्होंने कहा कि सौ वर्षों के भोग-विलास पूर्ण जीवन से एक दिन का त्याग का  जीवन श्रेष्ठ है। सौ वर्षों के पापमय जीवन से एक दिन का पुण्य का जीवन  श्रेष्ठ है। सौ पापी पुत्रों से एक पुण्यात्मा पुत्र श्रेष्ठ है। पाप की  कमाई के लाखों के दान से न्याय-नीति की कमाई का एक रुपए का दान भी श्रेष्ठ  है।
किसी भी धार्मिक अनुष्ठान  में अनुशासन जरूरी होता है। प्रभातसागर जी महाराज
प्रवचन बेला मे मुनिश्री प्रभातसागरजी  महाराज ने कहा कि किसी भी धार्मिक अनुष्ठान  में अनुशासन जरूरी होता है। हमें एक-एक पल का सदुपयोग करना चाहिए। आयोजकों  को चाहिए कि वह यहां वहां की बातों में व्यर्थ समय को न गवाएं। श्रद्धालुओं  को धर्मलाभ से वंचित न करें।
अन्ना  हजारे ने आचार्यश्री से आशीर्वाद लेकर आत्मबल को बढाया  मुनि श्री निरीहसागर जी
प्रवचन के दोरान मुनिश्री निरीहसागर जी महाराज ने कहा कि अन्ना  हजारे ने आचार्यश्री विद्यासागर जी  महाराज से आशीर्वाद लेकर ब्रह्मचर्य व्रत  को अपनाया था। उनकी ही प्रेरणा से वह कई वर्षों तक दस-दस उपवास कर अपने  आत्मबल को बढ़ाया। उन्होंने अपने आत्मबल से देशहित में अनेक आंदोलन किए एवं  महीनों अनशन पर बैठकर अलख जगाई। बहुत कुछ पाकर भी कुछ नहीं पाया, जो खुदा  से बेखबर है। कुछ नहीं पाकर भी सब कुछ पाया, जिसकी भगवान पर नजर है।
संकलन  अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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