डुंगरपुर-आचार्य अनुभव सागरजी महाराज 24 सितम्बर से रामकथा करेंगे। रामकथा आयोजन समिति के माध्यम से होने वाली रामकथा शहर के दशहरा मैदान में रोज सुबह 8:30 से 10 बजे तक होगी। आचार्य अनुभवसागरजी महाराज ने बताया कि महावीर जयंती पर शहर में आगमन के साथ ही सर्व समाज की ओर से कुछ विशेष आयोजन की प्रार्थना की गई थी। इसमें चातुमार्स के तहत डूंगरपुर रुकने पर श्रीराम कथा का आयोजन होगा। इसी उद्देश्य के तहत रामकथा के माध्यम से पांच उद्देश्य को आमजन तक पहुंचाने का काम किया जाएगा।
पहला दिन: अहिंसा के देवता श्रीराम
आचार्य ने कहा कि भगवान श्रीराम जंगल में 14 वर्ष तक रहने के बावजूद किसी भी जीव की हत्या नहीं की। इसी को आदर्श मानते हुए आज के समय में लोगो को मांसाहार त्यागने, डिब्बाबंद फुड को त्यागने, फास्ट फुड से दूर रहने का संदेश दिया जाएगा। इसके अलावा मद्यपान(शराब, कोल्ड ड्रीक) को छुड़वाने का आग्रह किया जाएगा।
दूसरा दिन: प्रकृति पुरुष श्रीराम
आज के समय में हर जनप्रतिनिधी, संस्थान, मीडियां, आमजन और स्वयंसेवी प्रकृति के महत्व को समझने लगे है। इसके लिए पेड-पौधे लगाना, सरंक्षण करना, प्लास्टिक के उपयोग को त्यागना, नदी-नालो का सरंक्षण और प्राकृतिक वातावरण को बनाने का प्रयास करते है। यही कार्य भगवान श्रीराम ने किया है। रामकथा के माध्यम से प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन पर फोकस होगा।
तीसरा दिन: मर्यादा सिखाने छात्र सम्मलेन होगा
भगवान श्रीराम जैसे आदर्श, मर्यादा और सर्वगुण सम्पन्न पुरुष नहीं हुआ है। इसी को ध्यान में रखते हुए आने वाली पीढ़ी को बनाना है। इसके लिए छात्र सम्मेलन रखा गया है। जिस प्रकार कुम्हार मिट्टी के चाक पर कोई भी आकृति दे सकता है। इसी प्रकार हमे युवा पीढ़ी को तैयार करना है। आज के युग में युवा पीढ़ी देश के प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को गाली देता है। ये गलत है। देश के मुखिया को गाली देना सबसे गलत है।
चौथा दिन: महिला सम्मेलन
भक्ति के आधार श्रीराम में महिला होगा। आचार्य ने कहा स्त्रियों के पास तीन पीढ़ी तक संस्कारवान बनाने का जिम्मा है। भगवान श्रीराम की माता ने भी पुत्र को जिस प्रकार संस्कार दिए और फोकस होगी।
पांचवा दिन: सर्वधर्म सम्मेलन
पांचवा दिन सर्वधर्म समभाव को लेकर कथा होगी। इसमें एक राष्ट्र की भावना जागृत करने के लिए कथा होगी। इसमें जाति, धर्म और संप्रदाय से अलग होकर एक राष्ट्र की भावना जागृत करने का कार्य होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमंडी
आचार्य ने कहा कि भगवान श्रीराम जंगल में 14 वर्ष तक रहने के बावजूद किसी भी जीव की हत्या नहीं की। इसी को आदर्श मानते हुए आज के समय में लोगो को मांसाहार त्यागने, डिब्बाबंद फुड को त्यागने, फास्ट फुड से दूर रहने का संदेश दिया जाएगा। इसके अलावा मद्यपान(शराब, कोल्ड ड्रीक) को छुड़वाने का आग्रह किया जाएगा।
दूसरा दिन: प्रकृति पुरुष श्रीराम
आज के समय में हर जनप्रतिनिधी, संस्थान, मीडियां, आमजन और स्वयंसेवी प्रकृति के महत्व को समझने लगे है। इसके लिए पेड-पौधे लगाना, सरंक्षण करना, प्लास्टिक के उपयोग को त्यागना, नदी-नालो का सरंक्षण और प्राकृतिक वातावरण को बनाने का प्रयास करते है। यही कार्य भगवान श्रीराम ने किया है। रामकथा के माध्यम से प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन पर फोकस होगा।
तीसरा दिन: मर्यादा सिखाने छात्र सम्मलेन होगा
भगवान श्रीराम जैसे आदर्श, मर्यादा और सर्वगुण सम्पन्न पुरुष नहीं हुआ है। इसी को ध्यान में रखते हुए आने वाली पीढ़ी को बनाना है। इसके लिए छात्र सम्मेलन रखा गया है। जिस प्रकार कुम्हार मिट्टी के चाक पर कोई भी आकृति दे सकता है। इसी प्रकार हमे युवा पीढ़ी को तैयार करना है। आज के युग में युवा पीढ़ी देश के प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को गाली देता है। ये गलत है। देश के मुखिया को गाली देना सबसे गलत है।
चौथा दिन: महिला सम्मेलन
भक्ति के आधार श्रीराम में महिला होगा। आचार्य ने कहा स्त्रियों के पास तीन पीढ़ी तक संस्कारवान बनाने का जिम्मा है। भगवान श्रीराम की माता ने भी पुत्र को जिस प्रकार संस्कार दिए और फोकस होगी।
पांचवा दिन: सर्वधर्म सम्मेलन
पांचवा दिन सर्वधर्म समभाव को लेकर कथा होगी। इसमें एक राष्ट्र की भावना जागृत करने के लिए कथा होगी। इसमें जाति, धर्म और संप्रदाय से अलग होकर एक राष्ट्र की भावना जागृत करने का कार्य होगा।
संकलन अभिषेक जैन लुहाडीया रामगंजमंडी

