देव, शास्त्र व गुरु के दर्शन करने के लिए जाते समय लिपिस्टिक व नेल पाॅलिश नहीं लगाएंगी महिलाएं



बिजोलिया-पार्श्वनाथ तपोदय तीर्थ क्षेत्र पर मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के सान्निध्य में दिगंबर जैन महिला महासमिति का दाे दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन शनिवार काे प्रारंभ हुआ। आरके मार्बल परिवार की सुशीला व शांता पाटनी ने ध्वजारोहण व दीप प्रज्जवलन किया।
दो प्रतिमा का व्रत धारण करने वाली दिल्ली की डाॅ. विमला पाटनी, गाेवाहाटी की उषा चूड़ीवाल, राधाेगढ़ की उषा जैन, चंदेरी की पिंकी जैन, अशाेकनगर की कांता व पुष्पा जैन तथा भाेपाल की इंदिरा व संगीता जैन सम्मान किया गया। समाज में रचनात्मक सेवाकार्य के लिए डाॅ. नीलम जैन झांसी, सुधा गंगवाल गाेवाहाटी, निधि जैन मुंबई, संध्या जैन भोपाल, जयश्री बांसवाड़ा व पदमा गदिया भीलवाडा को नारी गौरव की उपाधि से अंलकृत किया। राष्ट्रीय अध्यक्ष जयपुर की शीला डोरिया ने महिला महासमिति के उद्देश्य बताए। मंदसाैर से आईं पत्रकार चंदा जैन ने नारी की गृहस्थ जीवन शैली पर चर्चा की। वहीं संरक्षक सुशीला पाटनी ने महिलाओं को देव, शास्त्र व गुरु के समक्ष लिपिस्टिक व नेल पाॅलिश का उपयोग नहीं करने का संकल्प दिलाया। आचार्य श्री  विद्यासागर JI महाराज  के पांच सार्वभौमिक सिद्धातों की चित्रकला व पलाशणा सजावट के लिए आठ-आठ समितियों के उत्कृष्ट प्रयासों के लिए पुरस्कार की घोषणा की गई।
देशभर से आईं 3 हजार से अधिक महिलाओं को उपदेश देते हुए मुनि श्री  सुधासागर जी महाराज  ने कहा कि जैन धर्म मोक्ष के साथ-साथ गृहस्थ धर्म की भी उत्कृष्ट विवेचना करता है। विवाह महिला के पत्नी के रूप में दासी या पुजारिन बनने के लिए नहीं हाेता। बल्कि मां के रूप में पूज्य बनने के लिए हाेता है। विवाह भी एक दीक्षा है। अतः इसकी पवित्रता बनाए रखें। प्री वेडिंग शूट को समाज के लिए घातक बताते हुए उन्होंने कहा कि यह एक कुरीति है, जो रिश्तों को तोड़ने और संस्कारों को खत्म करने के लिए उत्तरदायी बन रही है। अध्यक्ष शीला डोरिया ने बताया कि सम्मेलन में आईं तीन हजार से अधिक महिलाओं के साथ उपस्थित श्रावकों का जुलूस रविवार सुबह 6 बजे बड़ा जैन मंदिर से तपोदय तीर्थ तक निकाला जाएगा। तीर्थ क्षेत्र पर महासमिति ने शांतिधारा कराई।
              संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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