अगर व्यक्ति को अपना जीवन सफल बनाना है तो उसे कर्म पर विश्वास करना होगा- मुनिश्री प्रमाण सागरजी

अभिषेक जैन लुहाडिया रतलाम- व्यक्ति को अपना जीवन सफल बनाना है तो कर्म पर विश्वास करना होगा। जो कर्मयोगी बनने की बजाय कर्मकांडी बनने की चेष्ठा रखता है वो अंधविश्वास का शिकार होकर अपने इस अनमोल जीवन को तमाम बुराइयों से घेर कर स्वयं का नाश कर लेता है।
यह बात संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागरजी के शिष्य, शंका समाधान के निष्पाण विद्वान मुनि श्री 108 प्रमाण सागरजी ने कही। दिगंबर जैन धर्म प्रभावना चातुर्मास समिति द्वारा लोकेंद्र भवन में आयोजित चातुर्मास में उन्होंने कर्म, कला, कौशल और कर्तव्य की महिमा बताई। उन्होंने कहा जो कर्म पर विश्वास रखता है वो दुनिया की जटिल से जटिल कठिनाइयों को हरा सकता है। उन्होंने कहा कर्मकांड अंधविश्वास फैलाता है और कई लोग, परिवार और समाज कर्मकांड और अंधविश्वास के साये में बर्बाद हो चुके है। अगर सभी अपने कर्म पर विश्वास रखेंगे तो जीवन सफल हो जाएगा। जीवन में सफलता उन्हें ही मिलती है जो कर्मयोगी होते है। परिवार, समाज और राष्ट्र के पति अपने दायित्व का पालन करो। जो लोग ड्यूटी इज ब्यूटी के सूत्र का पालन करते है वो पुरुषार्थी कहलाते है।
मां-बाप की सेवा से मिलती है बरकत-
प्रमाण सागरजी ने कहा माता-पिता की सेवा से बरकत मिलती है। अपने अभिभावकों को प्रसन्न रखना हर संतान का धर्म और फर्ज होना चाहिए। जो अपने इस कर्तव्य से विमुख होता है उसे जीवन में पछतावे का सामना करना पड़ता है

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