अतिशयश्री माताजी की देह पंचतत्व में विलीन

सरवाड़-कस्बे में गुरुवार देर रात आर्यिका अतिशयश्री माताजी का देवलोकगमन हो गया। उन्होंने सांसारिक जीवन का परित्याग कर संलेखना पूर्वक समाधि मरण को प्राप्त किया। शुक्रवार सुबह 8 बजे आदिनाथ भवन से आर्यिका अतिशयश्री माताजी की मोक्ष यात्रा निकाली गई। ढोल बाजों के साथ सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में निकाली मोक्षयात्रा आदिनाथ भवन से हलवाई गली, सदर बाजार, गांधी चौक, बस स्टैंड, लिंक रोड, चमन चौराहा, अजमेर कोटा मार्ग होते हुए खीरिया टोल नाका के पास स्थित दिगंबर समाज की भूमि पहुंची, जहां उनकी देह को अंतिम विदाई दी गई। मोक्ष यात्रा में प्रमुख  आर्यिका विज्ञाश्री माताजी के सान्निध्य में निकाली गई। भगवान आदिनाथ के जयकारों के बीच उनकी पार्थिव देह को परिजनों ने मुखाग्नि दी।  इस दौरान रास्ते में दोनों ओर माताजी के दर्शन को लेकर भारी भीड़ रही। सरवाड़ निवासी इन्द्रा देवी जैन विगत कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। गुरुवार शाम साढ़े 4 बजे इन्द्रा देवी ने सरवाड़ में विराजित आर्यिका विज्ञाश्री माताजी महाराज के समक्ष संलेखना पूर्वक दीक्षा प्राप्त करने की इच्छा जताई। सरवाड़ के जैन समुदाय के सैकडों धर्मावलम्बियों की उपस्थिति में आदिनाथ भवन में विराजित आर्यिका विज्ञाश्री माताजी ने उन्हें आर्यिका दीक्षा दी गई। कस्बे में जैन समाज के इतिहास में यह पहला अवसर था, जब किसी ने आर्यिका की दीक्षा ग्रहण की।
    संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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