चुनाव लडने का प्रतीक है जबकि नाव पार होने मे सहायक सिद्ध होती है आचार्य श्री विद्यासागर महाराज



जबलपुर-आचार्य श्री विधा सागर महाराज ने मांगलिक उदबोधन देते हुये कहा चुनाव और नाव मे फर्क जानते हों ? चुनाव लड़ने का प्रतीक है जबकि नाव पार लगाने मे सहायक है आपको क्या चाहिये? उन्होने कहा चुनाव लोकसभा इत्यादि बात नहीं है यहा तो पंचेद्रिय विषयो के चुनाव की बात है वस्तुतः पंचेद्रिय विषयो मे गाफिल नहीं होना ही मोक्षमार्ग का स्वरूप है यही करते जाओ आगे बढ़ते जाओ एक दिन सही स्वरूप पा जाओगे
     उद्गार प्रगट  करते हुये आचार्य श्री ने कहा "निजी नाभि मे गंध है म्रग भटके बिन ज्ञान" इसी तर्ज पर संसार मे ऐसी कही चीजे ऐसी है जिनका ज्ञान न होने के कारण हम भटक रहे है चारो तरफ गंध फ़ेल जाती है लेकिन इसका ज्ञान हमको नहीं हों पाता  आचार्य श्री ने कहा की आप अनेक वस्त्र रखे कोई बाधा नहीं पर चुनाव की प्रक्रिया न रखे क्योकि जो अनुकूलता है वह प्रतिकूलता है उसका कोई ठिकाना नहीं है सर्दी -गर्मी मर्यादा को कायम रखना है इसलिए वस्त्र का विकल्प रखे पर उसमे चुनाव का विकल्प न हों इतना भी यदि करले तो पंचम गुणस्थान की चर्चा मानी जा सकती है इसमे जितनी निर्दोषता आयेगी आज का श्रावक भी देव बनकर आगे मुक्ति का भाजक बन सकता है इसलिये अपनी द्रष्टि कॉ अनमोल रखकर सुरक्षित रखे विषयो मे फसे नहीं जो फसता नहीं वह ज्ञानी है
      संकलन अभिषेक जैन लुहाड़ीया रामगंजमंडी

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