राजनीतिक-मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव में भाजपा की हालत नाजुक थी और अब लोकसभा चुनाव में भी हालत पतली हो रही है और अब खिसकती हुई ज़मीन को बचाने के लिए भाजपा ने लोकसभा सीटों पर जनता का मन टटोलने के लिए प्रदेश के तीन बड़े नेता अगले कुछ दिनों तक ग्वालियर-चम्बल अंचल में आ रहे हैं ।
टिकिट वितरण के कयासों के बीच अब एक और खबर ये भी है कि ग्वालियर लोकसभा सीट पर इस बार मुकाबला मुन्ना वनाम महारानी होगा मुन्ना भैया यानी
केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और महारानी यानी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया । खबर है कि इस बार उम्मीद लगाए बैठे कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक सिंह को पार्टी ना कह सकती है । महारानी के चुनावी मैदान में आने से तोमर की मुश्किलें बढ़ सकती हैं क्योंकि मोदी सरकार में कद्दावर मंत्री होने के बावजूद भी जनता के बीच तोमर पकड़ नहीं बना पाए यही कारण है कि तोमर अपनी लोकसभा की सभी सीटों पर विधानसभा चुनाव नहीं जिता पाए, इसी बजह से कई बार तोमर के सीट बदलने की अफवाहें भी चुनावी गलियारों में सुनी जा रही थीं लेकिन खुद नरेंद्र सिंह ने सभी खबरों का खंडन कर दिया और साथ ही ग्वालियर से ही चुनाव लड़ने के संकेत दे दिए । महारानी के चुनाव मैदान में आने से अब न केवल तोमर की सीट खतरे में है बल्कि अंचल की सभी सीटों पर संकट से गुजर रही भाजपा के लिए मुश्किल हो सकती है । महारानी कांग्रेस के लिए संजीवनी बूटी साबित हो सकती है तो कांग्रेस के अशोक सिंह का राजनीतिक भविष्य समाप्ति की ओर जाएगा और नरेन्द्र सिंह तोमर के लिए दिल्ली की राह आसान नहीं होगी । कयासों के बीच क्या निर्णय होगा ये तो निकट भविष्य में ही पता लगेगा लेकिन दिल्ली जाने के सपने देखने वाले अशोक सिंह और केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के लिए खबर सुखद नहीं है । यदि महारानी का नाम पहली सूची में फाइनल होता है तो नरेन्द्र सिंह अपनी सीट बदल सकते हैं ऐसे में वे भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली विदिशा और भोपाल सीटों में से किसी एक को चुन सकते हैं ।
टिकिट वितरण के कयासों के बीच अब एक और खबर ये भी है कि ग्वालियर लोकसभा सीट पर इस बार मुकाबला मुन्ना वनाम महारानी होगा मुन्ना भैया यानी
केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और महारानी यानी प्रियदर्शिनी राजे सिंधिया । खबर है कि इस बार उम्मीद लगाए बैठे कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष अशोक सिंह को पार्टी ना कह सकती है । महारानी के चुनावी मैदान में आने से तोमर की मुश्किलें बढ़ सकती हैं क्योंकि मोदी सरकार में कद्दावर मंत्री होने के बावजूद भी जनता के बीच तोमर पकड़ नहीं बना पाए यही कारण है कि तोमर अपनी लोकसभा की सभी सीटों पर विधानसभा चुनाव नहीं जिता पाए, इसी बजह से कई बार तोमर के सीट बदलने की अफवाहें भी चुनावी गलियारों में सुनी जा रही थीं लेकिन खुद नरेंद्र सिंह ने सभी खबरों का खंडन कर दिया और साथ ही ग्वालियर से ही चुनाव लड़ने के संकेत दे दिए । महारानी के चुनाव मैदान में आने से अब न केवल तोमर की सीट खतरे में है बल्कि अंचल की सभी सीटों पर संकट से गुजर रही भाजपा के लिए मुश्किल हो सकती है । महारानी कांग्रेस के लिए संजीवनी बूटी साबित हो सकती है तो कांग्रेस के अशोक सिंह का राजनीतिक भविष्य समाप्ति की ओर जाएगा और नरेन्द्र सिंह तोमर के लिए दिल्ली की राह आसान नहीं होगी । कयासों के बीच क्या निर्णय होगा ये तो निकट भविष्य में ही पता लगेगा लेकिन दिल्ली जाने के सपने देखने वाले अशोक सिंह और केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर के लिए खबर सुखद नहीं है । यदि महारानी का नाम पहली सूची में फाइनल होता है तो नरेन्द्र सिंह अपनी सीट बदल सकते हैं ऐसे में वे भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली विदिशा और भोपाल सीटों में से किसी एक को चुन सकते हैं ।
