राजनीतिक हलचल-सूबे की राजनीति में भले ही बसपा कांग्रेस के साथ रही हो सरकार बनाने में लेकिन लोकसभा के चुनाव में बसपा ने कांग्रेस के साथ रहने से परहेज कर लिया है और वो अकेले ही चुनावी मैदान में है ।
मध्यप्रदेश की हाई प्रोफाइल सीट मानी जाने वाली गुना - शिवपुरी संसदीय क्षेत्र से बसपा और सपा ने अपना संयुक्त उम्मीदवार उतारा है । गुना से कांग्रेस के फायर ब्रांड नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया अभी सांसद हैं और सिंधिया परिवार की तीसरी पीढ़ी गुना का प्रतिनिधित्व कर रही है, महल प्रभावित सीट पर इस बार सिंधिया का गणित गड़बड़ा गया है । भाजपा ने सारे मोहरे प्रयोग करके देख लिए लेकिन सिंधिया के किले को भेदने में नाकाम ही रहे हैं । इस बार बसपा ने भी अपना उम्मीदवार उतारा है, यहाँ बसपा ने धाकड़ लोकेंद्र सिंह राजपूत को उतारकर न केवल सिंधिया को फँसाया बल्कि भाजपा को प्रत्याशी चयन को लेकर नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है ।
कांग्रेस का प्रत्याशी तो पूर्व से ही तय है लेकिन भाजपा अभी प्रत्याशी चयन में ही उलझी हुई है और उधर बसपा प्रत्याशी ने अपने तूफानी जनसंपर्क से संसदीय क्षेत्र की गली गली नाप ली है । बसपा प्रत्याशी को भरपूर समर्थन भी मिल रहा है, लोकेंद्र सिंह नुक्कड़ सभाओं और जन चौपालों के माध्यम से लोगों को सामन्तवाद के खिलाफ लड़ने के लिए जागरूक कर रहे । सोशल मीडिया पर लोकेंद्र सिंह की आईटी सेल की काफी शक्रिय है, "माफ करो महाराज,वक़्त है बदलाव का" के माध्यम से सिंधिया पर तंज कसा जा रहा है । यही नहीं गुना संसदीय क्षेत्र की दुर्दशा को लोकेंद्र सिंह जनता को तुलनात्मक रूप से मतदाता को दिखाने की कोशिश कर रहे हैं तभी तो विकास की भीख मांगती तस्वीरों के साथ ही लोकेंद्र सिंह अपने सपनों के गुना की तस्वीर सोशल मीडिया पर प्रचारित कर रहे हैं । नई सोच-नया गुना का भरोसा देकर लोकेंद्र सिंह जनमानस को बसपा के समर्थन में करने का प्रयास कर रहे हैं ।
बसपा ने सिंधिया का गणित तो बिगाड़ा ही है लेकिन उधर भाजपा को प्रत्याशी चयन में उलझा दिया है । लोकेंद्र सिंह अपने जातिगत वोटर के बीच तो पकड़ रखते ही है इसके अलावा बसपा के दलित वोट बैंक और ओबीसी चेहरे की दम पर मजबूत प्रत्याशी साबित हो रहे हैं, यही कारण है कि भाजपा प्रत्याशी घोषित होने के पूर्व ही सिंधिया को गुना पर गौर करना पड़ रहा है और उनका दर्द जुंबा पर आ रहा है कि इतना काम करने के बाद मैं शिवपुरी से हार क्यूँ जाता हूँ ।
मध्यप्रदेश की हाई प्रोफाइल सीट मानी जाने वाली गुना - शिवपुरी संसदीय क्षेत्र से बसपा और सपा ने अपना संयुक्त उम्मीदवार उतारा है । गुना से कांग्रेस के फायर ब्रांड नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया अभी सांसद हैं और सिंधिया परिवार की तीसरी पीढ़ी गुना का प्रतिनिधित्व कर रही है, महल प्रभावित सीट पर इस बार सिंधिया का गणित गड़बड़ा गया है । भाजपा ने सारे मोहरे प्रयोग करके देख लिए लेकिन सिंधिया के किले को भेदने में नाकाम ही रहे हैं । इस बार बसपा ने भी अपना उम्मीदवार उतारा है, यहाँ बसपा ने धाकड़ लोकेंद्र सिंह राजपूत को उतारकर न केवल सिंधिया को फँसाया बल्कि भाजपा को प्रत्याशी चयन को लेकर नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया है ।
कांग्रेस का प्रत्याशी तो पूर्व से ही तय है लेकिन भाजपा अभी प्रत्याशी चयन में ही उलझी हुई है और उधर बसपा प्रत्याशी ने अपने तूफानी जनसंपर्क से संसदीय क्षेत्र की गली गली नाप ली है । बसपा प्रत्याशी को भरपूर समर्थन भी मिल रहा है, लोकेंद्र सिंह नुक्कड़ सभाओं और जन चौपालों के माध्यम से लोगों को सामन्तवाद के खिलाफ लड़ने के लिए जागरूक कर रहे । सोशल मीडिया पर लोकेंद्र सिंह की आईटी सेल की काफी शक्रिय है, "माफ करो महाराज,वक़्त है बदलाव का" के माध्यम से सिंधिया पर तंज कसा जा रहा है । यही नहीं गुना संसदीय क्षेत्र की दुर्दशा को लोकेंद्र सिंह जनता को तुलनात्मक रूप से मतदाता को दिखाने की कोशिश कर रहे हैं तभी तो विकास की भीख मांगती तस्वीरों के साथ ही लोकेंद्र सिंह अपने सपनों के गुना की तस्वीर सोशल मीडिया पर प्रचारित कर रहे हैं । नई सोच-नया गुना का भरोसा देकर लोकेंद्र सिंह जनमानस को बसपा के समर्थन में करने का प्रयास कर रहे हैं ।
बसपा ने सिंधिया का गणित तो बिगाड़ा ही है लेकिन उधर भाजपा को प्रत्याशी चयन में उलझा दिया है । लोकेंद्र सिंह अपने जातिगत वोटर के बीच तो पकड़ रखते ही है इसके अलावा बसपा के दलित वोट बैंक और ओबीसी चेहरे की दम पर मजबूत प्रत्याशी साबित हो रहे हैं, यही कारण है कि भाजपा प्रत्याशी घोषित होने के पूर्व ही सिंधिया को गुना पर गौर करना पड़ रहा है और उनका दर्द जुंबा पर आ रहा है कि इतना काम करने के बाद मैं शिवपुरी से हार क्यूँ जाता हूँ ।
